धारावी को सरकार कर ही देगी…खल्लास!

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 4:01 AM IST

एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी बस्ती धारावी मुंबई की जमीन से गायब होकर जल्द ही इतिहास के पन्नों में पहुंच जाएगी।


सरकार ने यहां पर गगनचुंबी इमारतें खड़ी करने की पूरी तैयारी कर ली है। धारावी के कायाकल्प के लिए 13000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वैसे, इसके लिए धारावीवासियों को दर-बदर करने का सरकार का कतई इरादा नहीं है। इसीलिए उसने इन्हें 269 वर्ग फुट के फ्लैट देने की व्यवस्था की है।

यहां पर निर्माण के लिए चुनी जाने वाली कंपनियों द्वारा दिए गए प्रीमियम से ही सरकारी खजाने में 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जमा हो जाएगी। यही नहीं, ये कंपनियां यहां सीवर और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े तकरीबन 2500 करोड़ रुपये का विनिर्माण काम तो मुफ्त में ही कर देंगी।

बीड़ू, दाल में काला…

योजना को पहली नजर पर देखने पर तो लगता है कि हर लगे न फिटकरी, माल बने चोखा वाली कहावत यह एकदम सही हो रही है लेकिन एक नजरिए से बाकी मुंबई की तरह यहां भी सरकार, राजनीतिज्ञों और पूंजीपतियों के गठजोड़ के बीच गरीब, छोटे कारोबारी के साथ-साथ धारावी की पहचान पिसती हुई नजर आ रही है।

कौन देखा अइसा ख्वाब

वर्ष 1995 में तत्कालीन शिवसेना-भाजपा सरकार ने धारावी के विकास के लिए यह योजना बनाई थी। 4 फरवरी 2004 को महाराष्ट्र शासन ने भी इस योजना को हरी झंडी दिखा दी ।

इस योजना के तहत 223 हेक्टेयर में फैली लगभग 10 लाख की बस्ती वाली धारावी को झोपडामुक्त किए जाने का प्लान तैयार किया गया, जिसमें प्रत्येक धारावीवासी को 225 वर्ग फुट का फ्लैट मुफ्त में दिये जाने का वादा किया गया, जो अब बढ़ा कर 269 वर्ग फुट कर दिया गया है।

इस पूरी योजना के शिल्पकार एम.एम.प्रोजेक्ट कॉन्सलटेंटस प्रा.लि. के चेयरमैन मुकेश मेहता को बनाया गया। धारावी बचाओ के राजू कोडे कहते हैं कि इस पूरे प्लान में धारावी के लोगों के विकास की नहीं बल्कि मध्य मुंबई की कीमती जमीन के विकास की बात की जा रही है।

नियमइच बदल डाला

एसआरए नियमों के अनुसार मुंबई सिटी में झोपडपट्टी के पुनर्विकास करने के लिए निर्माता को पुनर्वसन और बिक्री का अनुपात 1:0.75 होता है जबकि उपनगरों के लिए यह अनुपात 1:1 रहता है।

धारावी मुंबई का हिस्सा होने के बावजूद इसे विशेष दर्जा देते हुए सरकार ने यहा पर यह अनुपात 1:1.33 रखा। इसका मतलब यह हुआ कि भवन निर्माता 225 वर्ग फुट का फ्लैट यदि लोगों को देगा तो 300 वर्ग फुट का फ्लैट वह बेचेगा। एफएसआई 2.5 से बढ़ाकर चार कर दिया गया । जिससे गगनचुंबी इमारतें बनने का रास्ता साफ हो गया। इस बारे में योजना के शिल्पकार मुकेश मेहता कहते हैं कि योजना में बढ़ती लागत को देखते हुए, ऐसा करना जरूरी था।

गिनती में भी लोचा 

सरकारी दावों में इस समय धारावी में कुल 50,899 झोपडे हैं।  ये आंकड़े धारावी के लोगों के गले नहीं उतरते हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता आर.बी. यादव के अनुसार, ये आंकड़े सरासर गलत हैं। उनका तर्क है कि 1985 में निर्मला निकेतन के सर्वे में धारावी में झोपडों की संख्या 85 हजार थी। उस समय धारावी का क्षेत्रफल 175 हेक्टेयर था, जो इस समय बढ़ कर 223 हेक्टेयर हो गया है।

झोपड़ी या सोने की मुर्गी

सोने की कीमत को भी मात देती मध्य मुंबई की जमीन पर आज सभी रीयल इस्टेट कंपनियों की निगाहें लगी हुई हैं। बांद्री कुर्ला कम्प्लेक्स से धारावी महज 50 मीटर की दूरी पर है। लगभग 100 रीयल स्टेट कंपनियों में से 19 कंपनियों यहां काम करने लायक पाया गया है। इनमें से 5 को अंतिम रूप से चुना जाएगा। बीकेसी में एक वर्ग फुट की कीमत 50000 रुपये है।

First Published : June 6, 2008 | 12:49 AM IST