सरकार की ओर से पान मसाला और गुटखा के उत्पाद कर में बढ़ोतरी किए जाने से छोटी कंपनियों पर बोझ बढ़ गया है।
जिसकी वजह से कानपुर शहर के कई छोटे गुटखा-पान मसाला उत्पादकों ने अपने कारोबार को समेट लिया है। उनका कहना है कि उत्पादन और मार्केटिंग लागत बढ़ जाने से उनका मुनाफा काफी घट गया है, ऐसे में गुटखा-पान मसाला का उत्पादन फायदे का सौदा नहीं रह गया है।
राजस्व विभाग ने पान मसाला पर 24 पैसे से 1.48 रुपये तक, जबकि गुटखा उत्पादों पर 33 पैसे से 2.03 रुपये प्रति पाउच उत्पाद कर बढ़ाने की घोषणा की है। इससे छोटे निर्माताओं की उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है, जिससे उन्हें कारोबार समेटने पर विवश होना पड़ रहा है।
शहर में इस कारोबार से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से तकरीबन पांच लाख लोग जुड़े हुए हैं, जिनके समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा होने का खतरा बना हुआ है। इसके साथ ही कन्नौज के इत्र उद्योग के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि यहां तैयार होने वाले करीब 90 फीसदी इत्र का इस्तेमाल गुटखा-पान मसाला उत्पादन में किया जाता है।
गुटखा-पान मसाला उद्योग बंद होने से नयागंज बाजार के कत्था, सुपारी और पिपरमिंट के कारोबार पर भी असर पड़ा है। इस क्षेत्र से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि पिछले एक हफ्ते से कत्था, सुपारी और पिपरमिंट की मांग काफी कम हो गई है। सुपारी के थोक विक्रेता मोहनलाल ने बताया कि अगर गुटखा उद्योग बंद होने लगेंगे, तो दूसरा कारोबार का रास्ता तलाशना होगा, क्योंकि सुपारी के प्रमुख खरीदार गुटखा निर्माता ही हैं।
पान मसाला निर्माता एस.के. गुप्ता का कहना है कि सरकार गुटखा उद्योग को खत्म करने पर तुली है। अगर ऐसा हुआ, तो इस कारोबार से जुड़े लाखों लोगों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि इस कारोबार से सुपारी, तम्बाकू किसानों के साथ-साथ पाउच निर्माता और ट्रांसपोर्टरों का हित भी जुड़ा हुआ है। अगर गुटखा उद्योग पर संकट खड़ा हुआ, तो इन्हें भी नुकसान होने की आशंका है।
उन्होंने बताया कि सरकार कर वृद्धि के जरिए राजस्व में इजाफा करना चाहती है, जोकि उचित निर्णय नहीं है। सरकार के इस कदम से गुटखा-पान मसाला निर्माताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। गोविंद नगर स्थित पान मसाला पाउच निर्माता कंपनी करुणा रोटो सेल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से पाउच की मांग में करीब 25 फीसदी की गिरावट आई है।
कंपनी के यूनिट मैनेजर रूपेश पाण्डेय ने बताया कि गुटखा-पान मसाला पाउच की मांग घटने से कंपनी अब ऑटो पाट्र्स और अन्य कंपनियों के लिए पाउच निर्माण करने की योजना बना रही है। इत्र के एक थोक विक्रेता ने बताया कि पिछले एक माह के दौरान इत्र की मांग में 15 फीसदी की गिरावट आई है। नयागंज बाजार के सुपारी विक्रेताओं ने बताया कि मांग घटने की वजह से सुपारी की कीमतों में भी करीब 15-20 रुपये प्रति किलो की कमी आई है।
उत्पाद कर में बढ़ोतरी से बंद हो रहीं गुटखा-पान मसाला कंपनियां
कन्नौज के इत्र उद्योग पर भी मंडरा रहा खतरा
सुपारी, कत्था, तम्बाकू कारोबार भी पड़ा मंदा