वाराणसी में रेशम और फैब्रिक निर्माण करने वाली छोटी-बड़ी कई कंपनियां हैं, जो अमेरिका समेत विभिन्न देशों को अपने उत्पाद निर्यात करती हैं लेकिन पिछले एक साल से उनका मुनाफा घट रहा है।
वजह- अमेरिकी मंदी और रुपये के मुकाबले डॉलर का कमजोर पड़ना। सेनर्जी फैब्रिक्रॉफ्ट के रजत का कहना है कि पिछले साल वाराणसी से यूरोपीय देशों को 200 करोड़ रुपये का रेशम और फैब्रिक निर्यात किया गया, लेकिन इस साल निर्यात में 75 फीसदी की गिरावट आई है।
उन्होंने बताया कि हमारे उत्पादों की मांग ऑस्ट्रेलिया, स्पेन और संयुक्त अरब अमीरात में खूब है, लेकिन रुपये की मजबूती के कारण मुनाफा घटा है। लखनऊ विश्वविद्यालय के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अजय प्रकाश का कहना है कि बांग्लादेश, पाकिस्तान और चीन के निर्यातकों को लाभ हो रहा है, लेकिन भारतीय निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
वजह साफ है- इन देशों की मुद्रा डॉलर के मुकाबले मजबूत नहीं है। सेनर्जी फैब्रिकॉफ्ट के मालिक ने बताया कि पिछले साल 200 करोड़ रुपये का वाराणसी फैब्रिक निर्यात किया गया था, जो इस साल घटकर 50 करोड़ रुपये रह गया है। इसके साथ ही चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान के उत्पाद कम कीमत पर उपलब्ध होने की वजह से खरीदार उनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। वाराणसी में 11 कंपनियां हैं, जो निर्यात कारोबार में जुटी हैं।
डॉलर के कमजोर पड़ने से निर्यातकों का मुनाफा घटा
चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान के उत्पादों से मिल रही है कड़ी टक्कर
निर्यात में आई 75 फीसदी तक की गिरावट
कारोबारियों ने की सरकार से कर में राहत की मांग
पिछले साल हुआ था 200 करोड़ रुपये का निर्यात