हमारे देश में हैं कितने सिंगुर?

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 9:01 PM IST

नंदीग्राम का महासंग्राम हो, टाटा के लिए गहरी समस्या बन चुका सिंगुर हो, या फिर पोस्को के लिए जटिल पहेली बन चुका उड़ीसा…


देसी-विदेशी कंपनियों के लिए देश में कोई प्रोजेक्ट शुरू करना मानों एवरेस्ट की चढ़ाई सरीखा बन गया है। मुद्दा हर जगह एक ही है, जमीन अधिग्रहण को लेकर होने वाला विरोध।

वैसे तो तमाम ऐसी कंपनियां हैं, जो इसके चलते या तो अपनी परियोजनाओं से हाथ खींच चुकी हैं या फिर उन्हें लंबे समय तक लटकाए रखना पड़ा है। जाहिर है, बड़े पैमाने पर हो रहीं ये घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि आखिर गलती किससे हो रही है…कंपनियों से या फिर बिना ठोस इंतजामात किए इन्हें बुलाने वाली अदूरदर्शी राज्य सरकारों से?

इन्फोसिस को समझाया, नहीं होगा नैनो जैसा हश्र

सिंगुर में हवन करते ही हाथ जलने जैसा हश्र झेल रहे रतन टाटा के हाल को देखकर घबराई इन्फोसिस टेक्नोलॉजी को प्रस्तावित परियोजना से हाथ न खींचने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार हर संभव तरीके से उसे मनाने में जुट गई है।

राज्य में अपने प्रस्तावित 500 करोड़ रुपये की निवेश योजना की समीक्षा करने की बात कहने के तुरंत बाद से ही सरकार इस प्रमुख आईटी कंपनी के साथ संपर्क में है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री देबेश दास ने शुक्रवार को बताया- मेरा विभाग इन्फोसिस के साथ लगातार संपर्क में है।

इन्फोसिस के बोर्ड सदस्य टी.वी. मोहनदास पई ने कहा था कि कंपनी पश्चिम बंगाल की अपने निवेश योजना पर फिर से विचार कर सकती है। पै ने कहा- हमें पुनर्विचार करना होगा क्योंकि हम अपने कर्मचारियों की सुरक्षा के प्रति चिंतित हैं।

इस प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनी की कोलकाता परिसर में 500 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना है, जो 5,000 पेशेवरों के लिए रोजगार देगी। कंपनी को अभी भी 90 एकड़ भूमि हासिल करनी है, जिसके बारे में उसे राज्य सरकार की तरफ से आश्वासन मिला था।

First Published : September 13, 2008 | 1:38 AM IST