अगर किसी कर्मचारी के पास उसकी ऑफिशियल छुट्टियां बची होती है तो उसे कंपनी या सरकार की ओर से लीव इनकैशमेंट मिलता है।
बता दें कि ऑर्गनाइज्ड सेक्टर (organized sector) के कर्मचारियों को मिलने वाली छुट्टियों को तीन भाग में बांटा जाता है, जिसमें कैजुअल लीव (CL), सिक लीव और अर्निंग लीव (EL) शामिल होते हैं।
अगर कर्मचारी एक साल में मिलने वाली कैजुअल लीव और सिक लीव नहीं लेते हैं तो वो लैप्स हो जाती हैं। लेकिन केवल EL को ही आगे बढ़ा दिया जाता है।
हालांकि, कुछ कंपनियां अपनी पॉलिसी के हिसाब से EL को लिमिटेड पीरियड के लिए ही आगे बढ़ाती हैं। अगर EL लीमिट से ज्यादा होती हैं तो कंपनी उसे भी लैप्स कर देती हैं।
कई लोगों के मन में सवाल होगा कि लीव इनकैशमेंट के बदले मिलने वाले पैसे पर इनकम टैक्स लगता है या नहीं?
आइए, जानते हैं कि लीव इनकैशमेंट के बदले मिलने वाले पैसे पर कब और कितना लगता है टेक्स…
आपको बता दें कि लीव इनकैशमेंट पर छूट तभी मिलती है, जब कोई कर्मचारी कंपनी से रिजाइन देने के बाद लीव इनकैशमेंट कराता है। लेकिन अगर कोई कर्मचारी अपनी जॉब के दौरान ही EL के बदले कैश लेता है तो उस पर टैक्स लगाया जाता है, क्योंकि उस अमाउंट को उसकी इनकम के रूप में ही देखा जाता है।
बता दें कि केवल सरकारी कर्मचारी को ही लीव इनकैशमेंट पर टैक्स देने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि उन्हें पूरी तरह से छूट दी जाती है। ध्यान रहे कि ये छूट केवल सरकारी कर्मचारियों को ही दी जाती है न कि किसी सरकारी कंपनी को या उपक्रमों में काम करने वाले कर्मचारियों को। इसलिए, यह छूट का नियम किसी भी सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और बिजली उत्पादन कंपनियों के कर्मचारियों पर लागू नहीं होता है।