उत्तर प्रदेश के छोटे और मध्यम आकार के उद्योगों को बेहतर प्रबंधकीय विशेषज्ञ और पर्यवेक्षक उपलब्ध कराने के लिए भारतीय औद्योगिक संगठन (आईआईए) ने एक खास तरीके के पाठयक्रम को शुरू करने की योजना बनाई है।
यह पाठयक्रम इन उद्योगों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा। इस अनोखे प्रयास के लिए आईआईए ने स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) और लखनऊ के जयपुरिया इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट के साथ हाथ मिलाया है।
आईआईए के कार्यकारी निदेशक डी एस वर्मा ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि माइक्रो और छोटे आकार के उद्योगों में बेहतर और दक्ष प्रबंधन स्नातकों को नियुक्त नहीं किया जा पाता क्योंकि इनके पास इतना अधिक पैसा नहीं होता कि वे मोटी तनख्वाह पर इन्हें भर्ती कर सकें।
अगर किसी भी क्षेत्र को विकास करना है तो उसके पास दक्ष प्रबंधकीय सलाह का होना जरूरी होता है। इन पाठयक्रमों को खास तौर पर एसएमई क्षेत्र की समस्याओं और कार्यप्रणाली में आने वाली दिक्कतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।’
उन्होंने कहा कि इस पाठयक्रम की अवधि पांच हफ्ते होगी और यह गैर स्नातकों और डिपलोमा धारकों के लिए तैयार किया जा रहा है।
इस पाठयक्रम के तहत छात्रों को वित्तीय , मार्केटिंग, उत्पादन और मानव संसाधन विषय से जुड़ी जानकारियां दी जाएंगी।
आईआईए उत्तर प्रदेश में माइक्रो, छोटे और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की सर्वोच्च संस्था है। मौजूदा समय में राज्य में करीब 15 लाख पंजीकृत और गैरपंजीकृत एमएसएमई हैं।
वर्मा ने कहा, ‘ज्यादातार एमबीए के छात्र बहुराष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी के लिए आकर्षित होते हैं और इस क्षेत्र की ओर उनका ध्यान नहीं जाता है। हम चाहते हैं कि छात्र अब एसएमई क्षेत्रों की ओर भी आकर्षित हों।’
इस पाठयक्रम को जयपुरिया में शुरू किया जाएगा और कुछ हद तक सिडबी इसके लिए वित्त मुहैया कराएगी। पाठयक्रम को तैयार करने का जिम्मा जयपुरिया का है और परिचालन सहायता आईआईए प्रदान करेगा।