गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी होना सामान्य

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 1:38 PM IST

केंद्र सरकार ने आज कहा कि पिछले कुछ सप्ताह के दौरान गेहूं के दाम में हुई बढ़ोतरी सामान्य है क्योंकि पिछले साल कीमत ‘कृत्रिम रूप से कम’ थीं। सरकार ने कहा कि जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए गेहूं का पर्याप्त भंडार मौजूद है। 
खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने संवाददाताओं से कहा, ‘पिछले साल दरें कम हुईं क्योंकि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने खुले बाजार में 70 लाख टन गेहूं बेचा। इसकी वजह से कृत्रिम दबाव बना। ऐसे में पिछले साल की तुलना में इस साल गेहूं की कीमत देखना उचित नहीं है। 2020 में जो कीमत थी, उससे तुलना की जानी चाहिए।’

उन्होंने कहा कि अगर 2020 की दरों से तुलना की जाए तो गेहूं की थोक कीमत में 11.42 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है और यह 27.57 रुपये प्रति किलो है, वहीं खुदरा कीमत में 12.01 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह 14 अक्टूबर को 31.06 रुपये किलो है। सचिव ने कहा कि गेहूं के दाम में बढ़ोतरी असामान्य नहीं है और यह न्यूनतम समर्थन मूल्य, ईंधन और ढुलाई के दाम व अन्य खर्च में बढ़ोतरी के मुताबिक है।
केंद्रीय पूल में गेहूं और चावल के स्टॉक के बारे में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के चेयरमैन अशोक केके मीणा ने कहा कि सरकार के पास 1 अक्टूबर तक 227 लाख टन गेहूं का स्टॉक है, जो 205 लाख टन बफर मानक से ज्यादा है। इसी तरह से चावल का स्टॉक 205 लाख टन है, जो उल्लिखित अवधि में 103 लाख टन ज्यादा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त खाद्यान दिए जाने, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और अन्य कल्याणकारी जरूरतों पर अनाज वितरण के बाद 1 अप्रैल, 2023 को गेहूं और चावल का अनुमानित स्टॉक सामान्य बफर मानकों की तुलना में बहुत ज्यादा होगा।
एफसीआई के मुताबिक केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक 1 अप्रैल, 2023 को 113 लाख टन रहने की उम्मीद है, जो 75 लाख टन बफर जरूरतों से ज्यादा होगा। इस अवधि में चावल का स्टॉक 237 लाख टन अनुमानित है, जबकि बफर जरूरत 136 लाख टन है। मीणा ने कहा कि सरकार आवश्यक जिंसों की कीमत की नियामकीय निगरानी और जरूरत के मुताबिक सुधारात्मक कदम उठाने को लेकर बहुत सतर्क है।
सरकार ने कहा कि धान की खरीद 2017 के बाद से लगातार बढ़ रही है और यह 2021 में 882 लाख टन तक पहुंच गया। किसानों को भुगतान किए जाने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य पर आने वाला व्यय भी 90,372.42 करोड़ रुपये से बढ़कर इस अवधि के दौरान 1,72,000 करोड़ रुपये हो गया है। खरीफ विपणन सत्र के दौरान धान की खरीद 771 लाख टन होने का अनुमान है और एमएसपी पर अनुमानित खर्च बढ़कर 1,58,826 करोड़ रुपये हो जाएगा।
इस साल 1 अक्टूबर से 16 अक्टूबर के बीच 1657.7 लाख टन धान की खरीद हुई है, जिसमें 39 लाख टन चावल की खरीद भी शामिल है। यह पिछले साल की तुलना में ज्यादा है। पिछले साल इस दौरान 50.57 लाख टन खरीद हुई थी। 16 अक्टूबर तक हरियाणा में 2021-22 में 24.1 लाख टन धान की खरीद हुई थी, जो 2022-23 में 26.97 प्रतिशत बढ़कर 30.6 लाख टन हो गई।
इस दौरान पंजाब में 2021-22 में 25.9 लाख टन धान की खरीद हुई थी, जो 18.15 प्रतिशत घटकर 2022-23 में 21.2 लाख टन हो गई। पूरे देश में इस दौरान 2021-22 में 50.4 लाख टन धान की खरीद हुई, जो 2022-23 में 14.48 प्रतिशत बढ़कर 57.7 लाख टन हो गई। धान की खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होती है। 
2022 में गेहूं की खरीद 188 लाख टन थी, जबकि जरूरत 192 लाख टन की थी। मीणा ने कहा कि मांग व आपूर्ति के इस अंतर को हासिल करने के लिए एफसीआई ने पहले से ही उल्लेखनीय मात्रा में स्टॉक रखा हुआ है और गेहूं की जरूरत से ज्यादा खरीद जारी है।

First Published : October 17, 2022 | 9:24 PM IST