केंद्र ने अंतरराष्ट्रीय विमानों द्वारा देश में आने और देश से जाने वाले सभी यात्रियों की जानकारियों को 8 अगस्त से कस्टम विभाग के साथ साझा करने का आदेश दिया है। निगरानी में सुधार के लिए यात्रियों का जोखिम-विश्लेषण करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। इससे तस्करी के बढ़ते मामलों को पता लगाने और रोकने में विभाग की मदद मिलेगी।
सोमवार को जारी एक अधिसूचना में कस्टम विभाग के नोडल प्राधिकरण केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने कहा कि प्रत्येक विमान संचालक को अब पंजीकरण करने और एक निर्धारित प्रारूप में यात्री नाम रिकॉर्ड (पीएनआर) विवरण प्रदान करने की आवश्यकता है। सीबीआईसी ने अधिसूचना में बताया कि इस रिकॉर्ड में पीएनआर, आरक्षण और टिकट जारी करने की तिथि, उड़ान की संख्या, और लाभ संबंधी जानकारी (जैसे निःशुल्क टिकट, अपग्रेड), सभी उपलब्ध भुगतान/बिलिंग जानकारी (जैसे क्रेडिट कार्ड नंबर), विशेष पीएनआर के लिए यात्रा कार्यक्रम, ट्रैवल एजेंसी / ट्रैवल एजेंट से जुड़ी जानकारियां शामिल है।अधिसूचना के मुताबिक द्वारा एनसीटीसी-पी की स्थापना विभिन्न अपराधों की रोकथाम, जांच, पता लगाने और कस्टम अधिनियम के तहत अपराधों की जांच के उद्देश्य से यात्रियों के जोखिम विश्लेषण के लिए पीएनआर जानकारी प्राप्त करने और संसाधित करने के लिए की गई है।
सरकार ने कहा कि यह भारत और विदेशों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सरकारी विभागों के लिए भी आवश्यक है। हालांकि सरकार ने वर्ष 2017 के केंद्रीय बजट में यात्री डेटा को साझा करने के लिए यह प्रस्ताव रखा था लेकिन इस औपचारिक प्रक्रिया को सोमवार को अधिसूचना जारी होने के बाद ही पेश किया गया।
इसके साथ ही अब भारत उन 60 अन्य देशों में शामिल हो गया है जो अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का पीएनआर विवरण इकठ्ठा करते हैं। वर्तमान में, एयरलाइंस को यात्री जानकारी अग्रिम रूप से आप्रवास अधिकारियों के साथ साझा करने की आवश्यकता होती है, लेकिन यह यात्री के नाम, राष्ट्रीयता, पासपोर्ट विवरण जैसी सूचनाओं तक ही सीमित है। सूत्रों का कहना है कि विशेष रूप से पीली धातु की तस्करी में वृद्धि के कारण यह कदम उठाया गया है। सोने पर आयात शुल्क पहले के 7.5 फीसदी से बढ़ाकर 12.5 फीसदी करने के बाद कस्टम विभाग तस्करी में वृद्धि देख रहा है।