कर्नाटक के शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर लगाए गए बैन के मामले की आज यानी 13 अक्टूबर को सुनवाई पूरी हुई। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धूलिया की खंडपीठ ने 10 दिनों की लंबी सुनवाई के बाद 22 सितंबर को इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस मामले में दो जजों की इस बेंच में दोनों जजों की राय अलग है।
खंडपीठ के एक जज जस्टिस सुधांशु धूलिया ने अपने फैसले में हाई कोर्ट का फैसला पलटने के पक्ष में फैसला लिखा है, तो वहीं जस्टिस हेमंत गुप्ता ने हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखने के पक्ष में फैसला सुनाया। अब इस मामले में बड़ी बेंच का गठन करने के लिए CJI को मामला भेजा जा रहा है। अब CJI यूयू ललित ही फैसला करने के लिए बेंच का गठन करेंगे।
बता दें खंडपीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली कुल 23 याचिकाओं पर सुनवाई की थी।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में दायर इस याचिका में कर्नाटक सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि सरकार हिजाब बैन के फैसले से मुस्लिम समुदाय को निशाना बना रही है। साथ ही मुस्लिम छात्राओं ने कोर्ट में यह दलील भी दी थी कि हिजाब पहनने से किसी के मौलिक अधिकार का हनन भी नहीं होता।
हिजाब धार्मिक आजादी के अधिकार के दायरे में है। हिजाब पर बैन लगने से लगभग 17000 छात्राओं ने परीक्षा नहीं दी या पढ़ाई छोड़ दी।