होम के साथ लोन भी स्वीट

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 1:45 PM IST

बढ़ती ब्याज दरों और प्रॉपर्टी की घटती मांग से परेशान प्रॉपर्टी डेवलपर्स अब लोगों को लुभाने के लिए हर पैंतरा अपनाने में जुट गए हैं। इन दिनों नई-नई स्कीमों की भरमार से तो कुछ ऐसा ही लगता है।


मसलन, यूनिटेक नोएडा में बनने वाले अपने यूनिवर्ल्ड सिटी प्रोजेक्ट में 1200 वर्गफीट और 1500 वर्गफीट एरिया में दो और तीन बेडरूम अपार्टमेंट मुहैया करा रहा है। इससे पहले कंपनी 1450 वर्गफीट एरिया में दो बेडरूम अपार्टमेंट बनाती थी, वहीं तीन बेडरूम में 1900 वर्गफीट एरिया कवर होता था।

दरअसल, कंपनी अपार्टमेंट की कीमतों को कम करने और लोगों को लुभाने के लिए टिकट साइज अपार्टमेंट बना रही है। कंपनी ने लोन के लिए एचडीएफसी बैंक से गठजोड़ किया है, जो 30 मासिक किस्तों में लोन मुहैया करा रहा है। इसके लिए खरीदार को 3400 रुपये प्रति वर्गफीट के हिसाब से 10 फीसदी राशि देनी होती है, जबकि शेष रकम का लोन फिक्स्ड ब्याज दर पर उपलब्ध है। कंपनी के मुताबिक, खरीदार इस स्कीम के प्रति आकर्षित हो रहे हैं, जिसकी वजह से 350 अपार्टमेंट में से 200 की बुकिंग दो हफ्तों में ही हो गई।

दिल्ली के पार्श्वनाथ डेवलपर्स ने भी सोनीपत और मुराबाद में कुछ ऐसी ही स्कीमें पेश की हैं। इसके तहत खरीदार को शुरू में बुकिंग राशि देनी होती है, जबकि प्रॉपर्टी पर कब्जा होने तक कोई मासिक किस्त नहीं देनी होती है। इसी तरह, अंसल एपीआई ने एचडीएफसी बैंक के साथ मिलकर स्कीम पेश की है। इसके तहत खरीदार को 10-15 फीसदी बुकिंग राशि देनी पड़ती है, जबकि मासिक किस्त प्रॉपर्टी पर कब्जा मिलने के बाद देनी पड़ती है।

एरा लैंडमार्क भी योजना बना रही है कि खरीदार को 50 फीसदी राशि प्रॉपर्टी पर कब्जा मिलने के बाद देनी होगी। बढ़ती ब्याज दरों और बिक्री में आई गिरावट की वजह से कंपनियां खरीदारों को आकर्षित करने के लिए इस तरह की योजनाएं पेश कर रही हैं। पार्क लेन प्रॉपर्टी एडवाइजर के प्रबंध निदेशक अक्षय कुमार का कहना है कि प्रॉपर्टी की मांग में आई गिरावट की वजह से डेवलपर्स को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में इस तरह की स्कीमों के जरिए प्रॉपर्टी की मांग बढ़ाने की संभावना तलाशी जा रही है।

प्रॉपर्टी की घटती मांग को देखते हुए डीएलफ, यूनिटेक और पार्श्वनाथ अब मध्यवर्गीय लोगों को ध्यान में रखकर 25-50 लाख रुपये के अपार्टमेंट बना रही हैं। इस तरह के अपार्टमेंट गुड़गांव, कोलकाता और चेन्नई के डेवलपर्स के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहे हैं। रीयल एस्टेट कंपनियों का मानना है कि मासिक किस्तों में छूट से किराए के मकान में रहने वाले भी अपना घर खरीदने की सोच सकते हैं, जबकि पहले अधिक ब्याज दरों की वजह से वे ऐसा करने से हिचकते थे।

पार्श्वनाथ के चीफ ऑपरेटिंग अधिकारी बी.पी. ढाका का कहना है कि प्रॉपर्टी पर कब्जा मिलने के बाद मासिक किस्त शुरू होने से मध्यवर्गीय लोग ऐसी स्कीमों के प्रति खासे आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि ऐसी स्कीमों से प्रॉपर्टी सस्ती नहीं हो रही है, बल्कि खरीदारों पर ब्याज दरों का बोझ और बढ़ जाता है। उदाहरण के तौर पर अंसल की ईएमआई छूट योजना को देखें, तो इसमें खरीदार को एक फीसदी ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ता है। यही नहीं, 24-30 माह बाद जब ईएमआई शुरू होती है, तब ब्याज दरों के बढ़ने का भी खतरा रहता है।

सीबी रिचर्ड ईलिश के साउथ एशिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अंशुमान मैगजीन का कहना है कि कोई भी बैंक बगैर अतिरिक्त शुल्क के इस तरह की स्कीमें नहीं लॉन्च कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि 24-30 माह की ईएमआई में छूट से खरीदार फायदा उठा सकते हैं और उस राशि को कहीं और निवेश कर सकते हैं। ब्याज दर बढ़ने से पिछले छह माह के दौरान प्रॉपर्टी की मांग में तकरीबन 15-20 फीसदी की गिरावट आई है।

कई डेवलपर्स दे रहे हैं ईएमआई अवधि में छूट
प्रॉपर्टी पर कब्जा के बाद देनी पड़ती है ईएमआई

First Published : July 28, 2008 | 1:50 AM IST