इन दिनों चल रही खबरों के बीच आप पाते होंगे कि भारत की राजधानी दिल्ली दमघोंटू हवा से हांफ रही है। प्रदूषण इतना ज्यादा बढ़ गया है कि दिल्ली में GRAP-1 और GRAP-2 के नियम लागू किए गए हैं। लेकिन इस बीच आपको चौंकाने वाली एक दूसरी खबर है। और वह है राजधानी के पास स्थित उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर की। जी हां, आप सही सुन रहे हैं। सोमवार को शाम 4 बजे सेंट्रल प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने अगले 24 घंटे के लिए डेली बुलेटिन जारी करते हुए बताया कि प्रदूषण के मामले में दिल्ली तो काफी पीछे है, नंबर 1 पर तो मेरठ है। भारत में मेरठ में सबसे ज्यादा प्रदूषण देखा जा रहा है। CPCB ने बताया कि मेरठ का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 382 है, जो हवा की ‘बहुत खराब’ कैटेगरी में आता है।
मेरठ के बाद ग्रेटर नोएडा का नंबर आता है, जहां AQI 299 था, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। आंकड़ों के अनुसार सोमवार को 280 AQI के साथ भरतपुर तीसरा सबसे अधिक वायु प्रदूषित भारतीय शहर था।
CPCB की रिपोर्ट में दिल्ली-NCR देश के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में से एक था, ज्यादातर शहरों की हवा ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई। दिल्ली में AQI 263 था, इसके बाद बहादुरगढ़ में 262 और फरीदाबाद में 256 था। गुरुग्राम का पड़ोसी मानेसर भी 248 AQI के साथ टॉप 10 प्रदूषित शहरों में शामिल था। नोएडा में AQI 229 और गाजियाबाद में AQI 220 दर्ज किया गया था। माना जा रहा है कि दिल्ली के AQI में 26 अक्टूबर के बाद ही सुधार हो सकेगा।
हालांकि रिपोर्ट में, मुंबई का AQI 177 के साथ दिल्ली-एनसीआर से बेहतर था। गुरुग्राम का AQI भी 182 के साथ इसके आसपास के इलाकों से बेहतर था।
बता दें कि पर्यावरण में हवा की गुणवत्ता मापने के लिए AQI की छह श्रेणियां बनाई गई हैं: ‘अच्छा’, ‘संतोषजनक’, ‘मध्यम ‘, ‘खराब’, ‘बहुत खराब’ और ‘गंभीर’ यानी सीरियस कंडीशन।
AQI स्केल के अनुसार, 0 और 50 के बीच हवा की गुणवत्ता की जांच ‘अच्छी’, 51 और 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 और 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बहुत खराब’, और 401 से 450 ‘सीरियस’ माना जाता है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के वैज्ञानिक वीके सोनी ने सोमवार को ANI को बताया कि ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के लागू होने से दिल्ली की वायु गुणवत्ता में कुछ सुधार होगा, लेकिन यह 26 अक्टूबर तक ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहेगी। दिल्ली को पिछले हफ्ते सरकार ने GRAP-II के तहत रखा था।
IMD साइंटिस्ट ने कहा कि सोमवार को AQI 300 के करीब था और उम्मीद है कि GRAP 2 के तहत किए गए उपायों से हवा की गुणवत्ता में फायदा होगा।
GRAP को कुल चार चरणों बांटा गया है। हवा की गुणवत्ता जब ‘खराब’ हो जाती है तो GRAP के नियम लागू हो जाते हैं। जब हवा की क्वालिटी ‘बहुत खराब’ यानी 301 और 400 के बीच रहती है तो GRAP 2 लागू किया जाता है यानी GRAP के दूसरे चरण को लागू किया जाता है। AQI के 400 पार होते ही GRAP 3 लागू कर दिया जाता है। और जब ये कंडीशन आ जाती है तो विशेष रूप से वाहनों के संचालन पर कई तरह के प्रतिबंध भी लगा दिए जाते हैं, जैसे- कमर्शियल वाहन, ट्रक और कुछ मालवाहक वाहन पर प्रतिबंध, कंस्ट्रक्शन पर बैन आदि।
और जब AQI 450 के पार भी चला जाता है यानी कंडीशन बड़ी ‘सीरियस’ हो जाती है तो GRAP 3 लगा दिया जाता है। ये लॉकडाउन जैसी कुछ स्थिति होती है।
GRAP भारत के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लागू दिशानिर्देशों और उपायों का एक समूह है, जिसमें दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।