भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(एनएचएआई) ने नई राजमार्ग परियोजनाओं के ठेके देने की प्रक्रिया को धीमा करने का निर्णय लिया है।
इससे आधुनिकीकरण की प्रक्रिया और राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार में कुछ महीनों का विलंब होगा। वित्त मंत्रालय द्वारा लाये गये मॉडल कन्सेशन एग्रीमेंट (एमसीए) को नेशनल हाईवे बिल्डर्स फेडरेशन ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर चुनौती दी है।
ठेके देने की प्रक्रिया इसके बाद धीमी हो गई है। इस समझौते के तहत बोली लगाने वाले पूर्व-पात्र अंतिम बोली की प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकते हैं। एनएचएआई ने पहले ही 6,700 करोड़ रुपये की नौ परियोजनाओं के लिए पात्रता-पूर्व आवेदन आमंत्रित किए थे लेकिन ठेके को अंतिम रुप दिया जाना अभी बाकी है।
आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-9 (एनएच-9) के हैदराबाद-विजयवाड़ा हिस्से को लगभग 1,460 करोड़ रुपये की लागत से चार लेन में तब्दील करना, उड़ीसा में एनएच-215 के पनिकोईली-केओझर-रिमौली हिस्से को 1,086 करोड़ रुपये की लागत से चार लेन में बदलना और उड़ीसा के ही एनएच-200 के चांदीखोले-दुबारी-तलचेर हिस्से को चार लेन वाला बनाना, प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है।
एनएचएआई ने 30,000 करोड़ रुपये की लगभग 27 परियोजनाओं के लिए भी पात्रता-पूर्व आवेदन आमंत्रित किया है जो जून महीने तक दाखिल किया जाएगा। यद्यपि अदालत ने बोली लगाने की प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई है लेकिन औद्योगिक सूत्रों का कहना है कि अदालत के फैसले की अनिश्चितता के कारण एनएचएआई की प्रक्रिया धीमी चल रही है। फैसला नौ जुलाई तक आने की उम्मीद है।
सूत्रों के अनुसार अगर अदालत का फैसला बिल्डरों के पक्ष में आता है तो एनएचएआई को अर्जी की अवधि के दौरान दिए गए सभी परियोजनाओं के ठेके की पूरी बोली-प्रक्रिया को नये सिरे से संचालित करने की जरुरत होगी। इसलिए एनएचएआई अदालत का फैसला आने से पहले पात्रता-पूर्व आवेदन मंगवाने और उनकी छंटाई करने जैसे प्रथमिक कार्यों को अंजाम दे रही है।
संपर्क करने पर एनएचएआई के अधिकारियों ने इइस मसले पर कुछ भी कहने से इनकार करदिया क्योंकि मामला न्यायालयाधीन है। 5 दिसंबर 2007 को एमसीए के नए दिशानिर्देश के लागू होने के बाद एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग विकास योजना (एनएचडीपी) के पांचवें चरण के तहत 5,900 करोड़ रुपये की लागत वाले पांच ठेके फरवरी महीने में राजमार्गों को छह लेन वाला बनाने के लिए दिया था। तब से कोई नया ठेका नहीं दिया गया है।
सूत्रों का कहना है कि नये एमसीए दिशानिर्देशों के तहत फरवरी में दिए गए ठेके वैसी परियोजनाओं के लिए दिए गए थे जिनकी प्राथमिक बोली प्रक्रिया और छंटनी का काम 18 जनवरी को दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने से पहले पूरा कर लिया गया था।
बिल्डरों ने नये दिशानिर्देशों को यह कहते हुए चुनौती दी है, जिसके तहत बोली की प्रक्रिया में केवल पांच प्रतिभागियों को शामिल होने की अनुमति है, कि नई नीति योग्य बोली लगाने वालों के खिलाफ जाता है और जिसका परिणाम शीर्ष पांच संभावित बोली लगाने वालों के कार्टेलाइजेशन के रुप में हो सकता है।