‘भारत जोड़ो या सीट जोड़ो? केरल में 18 दिन और उत्तर प्रदेश में दो दिन! यह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लड़ने का अजब तरीका है।’ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा ने 21 सितंबर को भारत जोड़ो यात्रा की योजना की आलोचना करते हुए ऐसा एक ट्वीट किया था।
राहुल गांधी की यात्रा 13 दिन पूरे कर चुकी है। ऐसे में कई ट्वीट सिलसिलेवार ढंग से हुए हैं। इसमें किसी ट्वीट में राहुल गांधी को ‘फूड ब्लॉगर’ कहा गया। किसी ट्वीट में राहुल की टी-शर्ट का दाम उजागर कर सार्वजनिक तौर पर चर्चा की गई। लेकिन कांग्रेस को सबसे ज्यादा इस सवाल से गुजरना पड़ रहा है कि भाजपा के लंबे समय से गढ़ कहे जाने वाले गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को पदयात्रा में शामिल क्यों नहीं किया गया।
यह पदयात्रा 7 सितंबर को शुरू हुई और यह 150 दिनों में 3,750 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। वामपंथी दल इस यात्रा की इस बात को लेकर आलोचना कर रहे हैं कि यह यात्रा अधिक समय तक केरल में रहेगी। केरल में भाजपा का वोट प्रतिशत केवल 10-12 फीसदी है। हालांकि इस यात्रा का मकसद कांग्रेस को राष्ट्रीय राजनीति में विकल्प के तौर पर पेश करना है।
माकपा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने राज्य में प्रदर्शनों की अगुआई करने वाली शक्तियों के साथ सिलसिलेवार बैठकें की हैं। जैसे राहुल ने शुरुआती दौर में केरल के मछुआरे समुदाय के साथ बैठकें कीं। बैठक में मछुआरों ने विझिंजम में 7,500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अदाणी समूह के अंतरराष्ट्रीय समुद्री बंदरगाह के खिलाफ आवाज उठाई थी। इस बंदरगाह के खिलाफ आवाज उठाने वालों को लैटिन कैथलिक चर्च ने समर्थन किया था। चर्च के प्रतिनिधियों ने गांधी परिवार के इस युवा नेता से मुलाकात भी की थी। राहुल ने ‘के-रेल’ का विरोध करने वाले लोगों से मुलाकात की और फिर इसे ‘गैरजरूरी’ भी करार दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह कदम माकपा सरकार के खिलाफ है। इस योजना का मकसद केरल में कांग्रेस की लोकसभा सीटों को बरकरार रखना है। कांग्रेस ने लोकसभा में कुल 53 सीटें जीती थीं जिनमें से19 सीटें केरल से मिली थीं। केरल से माकपा के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा,’लोकसभा की 190-200 सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस को भाजपा से लड़ना है। दुर्भाग्यवश भारत जोड़ो यात्रा में उन क्षेत्रों पर ध्यान नहीं दिया गया है। केरल में 18 दिन यात्रा का कोई मतलब ही नहीं है। वे बड़ी तस्वीर के आशय को समझना नहीं चाहते हैं।’ ब्रिटास के अनुसार कांग्रेस को यह यात्रा गुजरात से शुरू करनी चाहिए थी और लोकसभा में कांग्रेस की मौजूदा सीटें बचाने के बजाए यह यात्रा पूरे उत्तर प्रदेश में निकाली जानी चाहिए थी।
भाजपा ने भी विझिंजम बंदरगाह पर राहुल के नजरिये को लेकर सवाल उठाए। भाजपा के उपाध्यक्ष ए एन राधाकृष्णन ने कहा,’यह परियोजना तब शुरू हुई थी जब उम्मेन चांडी केरल के मुख्यमंत्री थे। राहुल की यात्रा का कोई उद्देश्य या दूरदृष्टि नहीं है। वह केवल केरल में अपनी जीती हुई सीटों को फिर से जीतना चाहते हैं।’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस में प्रमुख राज्यों जैसे उत्तर प्रदेशऔर गुजरात में लोकसभा की सीटें जीतने की सामर्थ्य नहीं है।
यह 150 दिन की यात्रा है। राजस्थान और कर्नाटक में से हरेक में 21 दिन, तेलंगाना में 13 दिन, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में से हरेक में 16 दिन, दिल्ली में 2 दिन, हरियाणा में 12 दिन, पंजाब में 11 दिन निकाली जाएगी। फिर यह यात्रा जम्मू-कश्मीर में दाखिल हो जाएगी। यह यात्रा चुनाव वाले राज्यों जैसे गुजरात, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ में नहीं जाएगी जिसकी आलोचना की जा रही है। चर्चा है कि भाकपा की निंदा के बाद उत्तर प्रदेश में यात्रा के दिन बढ़ाकर पांच कर दिए गए हैं।
इसके जवाब में कांग्रेस ने कहा कि यात्रा के लिए पांच मार्गों पर चर्चा हुई थी। इस मार्ग को भूगोल, लॉजिटिक्स और सुरक्षा के कारण चुना गया था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व सांसद जयराम रमेश ने कहा कि केरल के दक्षिण से लेकर राज्य के उत्तर तक की दूरी 370 किलोमीटर है। इस दूरी को पूरा करने में 18 दिन लगेंगे जिसमें दो दिन का आराम भी है। रमेश ने माकपा पर पलटवार करते हुए कहा कि वामपंथी दल भाजपा की ‘ए’ टीम है।
इसके अलावा कांग्रेस ने यह तर्क भी दिया कि गुजरात में जाने से यात्रा के सात दिन और बढ़ जाते। यात्रा को नरेंद्र मोदी के गृह राज्य पहुंचने में कम से कम 90 -95 दिन लग जाते और यह यात्रा चुनाव शुरू होने से पहले नहीं पहुंच पाती। हालांकि कांग्रेस में अब भी एक समूह का मानना है कि जब तक तक यात्रा हिन्दी भाषी क्षेत्र में पहुंचेगी, तब तक मीडिया और लोगों का रुचि खत्म हो सकती है।