पेइचिंग ओलंपिक की जहां पूरी दुनिया खुशी मना रही है, वहीं मध्य प्रदेश के सोया उत्पादक किसानों को फसल बर्बाद होने का खतरा सता रहा है।
दरअसल, चीन में खेलों के दौरान प्रदूषण नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए लगभग सभी ऑर्गेनो-फास्फोरस उत्पादक संयंत्रों को बंद कर दिया गया है। ऐसे में कीटनाशकों में इस्तेमाल होने वाले रसायन भारत नहीं आ पा रहा है, जिसकी वजह से सोया उत्पादकों को कीटनाशकों की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि इस साल राज्य में पर्याप्त मात्रा में सोया का उत्पादन होगा, लेकिन सूत्र बताते हैं कि राज्य के किसान कीटनाशकों पर सब्सिडी की मांग कर रहे हैं। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से केंद्र को 112 करोड़ रुपये की सब्सिडी देने का प्रस्ताव भी भेजा गया है।
भारत के सभी कीटनाशक निर्माता कंपनियों को चीन से रसायन की आपूर्ति की जाती है, लेकिन खेलों की वजह से इसकी आपूर्ति ठप है, जिससे कीटनाशकों का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। वहीं राज्य के प्रमुख सोया उत्पादक क्षेत्रों- उौन, रतलाम, झाबुआ और इंदौर में जुलाई के अंतिम सप्ताह और अगस्त के प्रथम हफ्ते में बारिश नहीं होने की वजह से कीटों का खतरा बढ़ गया था।
उनका कहना है कि अगर कुछ दिन बारिश नहीं हुई तो कीट फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। कीटनाशकों की कमी के चलते राज्य में इसकी कीमतों में 150 से 250 फीसदी तक उछाल आया है। इसकी वजह से पहले जहां एक हेक्टेयर क्षेत्र में कीटनाशकों पर 1000 रुपये खर्च करना पड़ता था, वहीं इस साल बढ़कर यह 1500 रुपये तक पहुंच गया है।
धनुका ग्रुप के चेयरमैन आर.जी. अग्रवाल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि ओलंपिक खेलों के अलावा, उत्पाद शुल्क में 120 फीसदी बढ़ोतरी, पेट्रो उत्पादों की कीमतों में तेजी की वजह से कीटनाशकों की कीमतों में उछाल आया है।
ओलंपिक के कारण चीन से नहीं आ रहा कीटनाशकों का रसायन
मप्र में कीटनाशकों की कीमतों में 150-250 फीसदी का आया उछाल
बारिश नहीं होने से बढ़ सकता है कीटों का खतरा
किसानों ने की कीटनाशकों पर सब्सिडी की मांग