पॉलिसीबाजार और एको जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के साथ कॉर्पोरेट एजेंटों को अपने कमीशन का खुलासा करना पड़ सकता है, जो वे बीमा कंपनियों से पॉलिसी बेचने के बदले में पाते हैं। यह कदम पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के संरक्षण को लक्षित है। इससे उत्पादों के बारे में भ्रम खत्म हो सकता है, जो ज्यादा कमीशन या पुरस्कार के कारण बेहतर बताए जाते हैं।
वेब एग्रीगेटरों को ‘इंश्योरेंस पॉलिसीहोल्डर प्रोटेक्शन’ नाम से एक विशेष सेक्शन डालना पड़ सकता है। उन्हें कमीशन की दरों व पुरस्कार का खुलासा करना होगा, जो उन्हें बीमा कंपनियों से उनके उत्पाद की बिक्री के बदले मिलता है। कॉर्पोरेट एजेंटों और ब्रोकरों के लिए कमीशन की रिपोर्टिंग भी अनिवार्य किया जा सकता है।
भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसमें बीमा कंपनियों द्वारा किए गए व्यय की सीमा तय करने की बात कही गई है। इसमें कंपनियों का परिचालन व्यय, कमीशन और पुरस्कार शामिल है। मौजूदा स्थिति में खर्च के लिए कारोबार के स्तर पर और परिचालन, कमीशन और रिवार्ड के लिए अलग अलग सीमा तय की गई है।
प्रस्ताव बीमा कंपनियों के उचित बाजार व्यवहार और व्यय प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। बीमाकर्ता हर पॉलिसी के लिए कमीशन का खुलासा कर सकते हैं, साथ ही वे मध्यस्थ के नाम भी बता सकते हैं। एक अधिकारी ने कहा कि इस कदम का मकसद ग्राहकों को वास्तविक सलाह देना और व्यावसायिक हित के बारे में जागरूक बनाना है। उन्होंने कहा कि उचित खुलासे से ग्राहकों को साफ-साफ पता चल जाएगा कि क्या एजेंट ज्यादा कमीशन वाली पॉलिसी बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इससे एक संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, जिसमें सेवा प्रदाताओं से ग्राहक ज्यादा सेवाएं प्रदान करने को कर सकते हैं।