तेल पर महाभारत का राजनीतिक बिगुल

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 3:42 AM IST

तेल कंपनियों की टूटती कमर को देखते हुए मनमोहन सरकार ने पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी के दामों में बढ़ोतरी की घोषणा तो कर दी, पर उम्मीद के मुताबिक ही सभी राजनीतिक पार्टियों ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है।


ऐसा विरले ही देखा जाता है कि कांग्रेस किसी मसले पर अलग थलग नजर आ रही हो। पर इस बार माजरा कुछ ऐसा ही है। मसले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कीमतों में बढ़ोतरी का स्पष्टीकरण देने के लिए राष्ट्र के नाम संबोधन देना पड़ रहा है।

तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें 135 डालर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंचने से तेल विपणन कंपनियों के समक्ष उत्पन्न संकट को दूर करने के लिए सरकार ने आज पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला किया। हालांकि केरोसिन को कीमत वृध्दि के दायरे से बाहर रखा गया है।

‘आर्थिक आतंकवाद’ है: भाजपा

भारतीय जनता पार्टी ने पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमत बढ़ाने के लिए केन्द्र की संप्रग सरकार की भर्त्सना करते हुए कहा कि वह देश में ‘आर्थिक आतंकवाद’ फैला रही है। भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने प्रधानमंत्री को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यह कदम अर्थव्यवस्था के लिए घातक है और प्रधानमंत्री द्वारा मंहगाई के बारे में अब तक किए गए सभी दावे थोथे साबित हुए हैं।

सड़क पर उतरेगा वामदल

कीमतों में बढ़ोतरी को ‘आम आदमी के मुंह पर तमाचा’ करार देते हुए वाम दलों ने देश भर में सप्ताह भर के आंदोलन का ऐलान किया। संप्रग सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वाम मोर्चे में शामिल चारों दलों माकपा, भाकपा, आरएसपी और फॉरवर्ड ब्लाक के नेताओं ने ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी को ‘जनता पर प्रहार’ करार देते हुए फैसले पर फिर से विचार के लिए सरकार पर दबाव बनाने को कहा है।

आम लोगों की टूटेगी कमर

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रमुख घटक जनता दल यूनाइटेड ने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी तत्काल वापस लेने की मांग की। पार्टी महासचिव जावेद रजा ने कहा कि इस फैसले से मंहगाई में और इजाफा होगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने अपना यह फैसला वापस नहीं लिया तो आम जनता  के पास इस सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए सड़कों पर उतरने के अलावा विकल्प नहीं होगा।

दुर्भाग्यपूर्ण फैसला: राजद

केन्द्र में सत्तारूढ संप्रग सरकार के दूसरे सबसे बड़े घटक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने मूल्य वृध्दि को दुभार्ग्यपूर्ण बताते हुए इसे आम आदमियों के हितों के विरूध्द करार दिया। पार्टी ने कहा कि इस कदम से सारा बोझ आम आदमी पर पड़ेगा और उन्हें इसकी टीस महसूस होगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस फैसले को वापस लेने की अपील की और साथ ही कहा कि इस फैसले पर वामदलों के विरोध को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।

राज्यों में बंद का ऐलान

वाम दलों ने सरकार से इस फैसले की समीक्षा करने की मांग करते हुए अपने शासन वाले तीन राज्यों केरल, पश्चिम बंगाल तथा त्रिपुरा में गुरुवार को 12 घंटे के बंद का आहवान किया है।

First Published : June 5, 2008 | 12:52 AM IST