जीवन बीमा कंपनियों को लक्ष्य देने के बाद भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने अब ऐसा ही लक्ष्य गैर जीवन बीमा कंपनियों को दिया है। इस मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा कि इसका मकसद बीमा की पहुंच वित्त वर्ष 27 तक बढ़ाकर 2.52 प्रतिशत करना है, जो अभी वित्त वर्ष 21 के आंकड़ों के मुताबिक 1 प्रतिशत है।
नियामक चाहता है कि जनरल इंश्योरेंस का प्रीमियम वित्त वर्ष 27 तक बढ़ाकर 11.7 लाख करोड़ रुपये किया जाए, जो वित्त वर्ष 22 में 2.20 लाख करोड़ रुपये था। नियामक के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 22 में गैर जीवन बीमा उद्योग का प्रीमियम इसके पहले के साल की तुलना में महज 11 प्रतिशत बढ़ा है।
इरडा की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 21 तक देश में गैर जीवन बीमा की पहुंच सिर्फ 1 प्रतिशत रही है, जबकि जीवन बीमा की पहुंच 3.2 प्रतिशत है। वहीं देश में कुल मिलाकर बीमा की पहुंच महज 4.20 प्रतिशत तक रही है। बीमा की पहुंच को जीडीपी के प्रतिशत के रूप में मापा जाता है।
इस मामले से अवगत निजी क्षेत्र के एक अधिकारी ने कहा, ‘नियामक का दृष्टिकोण जनरल इंश्योरेंस का बाजार 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 11 लाख करोड़ रुपये करने का है, जिससे कि इसकी पहुंच अधिक आबादी तक हो सके। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए वे तमाम नियामकीय बदलाव करना चाहते हैं। नियामक ने कंपनियों के प्रदर्शन और विभिन्न मानकों के आधार पर उन्हें व्यक्तिगत लक्ष्य दिया है। लक्ष्य तय करने का एकमात्र मकसद इसकी पहुंच बढ़ाना है। विचार यह है कि कवरेज में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो।’
इस सिलसिले में इरडा को भेजे गए पत्र का उचित उत्तर नहीं मिल सका। सभी गैर जीवन बीमा कंपनियां, जिसमें निजी क्षेत्र के सामान्य बीमाकर्ता, सार्वजनिक क्षेत्र के सामान्य जीवन बीमाकर्ता, एकल स्वास्थ्य बीमाकर्ता और विशेषीकृत सामान्य पीएसयू बीमाकर्ताओं का अगले 5 साल के लिए वृद्धि का लक्ष्य तय किया गया है।
बड़ी परंपरागत गैर जीवन बीमा कंपनियां जैसे आईसीआईसीआई लोंबार्ड, एचडीएफसी एर्गो, बजाज अलियांज जनरल को अगले 5 साल में क्रमशः 40 प्रतिशत, 38 प्रतिशत और 38 प्रतिशत प्रीमियम बढ़ाने का लक्ष्य दिया गया है। कुछ कंपनियों को 100 प्रतिशत से ज्यादा का वृद्धि लक्ष्य दिया गया है। वहीं सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों को प्रीमियम में हर साल 25 प्रतिशत बढ़ोतरी का लक्ष्य दिया गया है।