धर्म आधारित जनसंख्या असंतुलन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता: RSS प्रमुख भागवत

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 2:06 PM IST

नागपुर में बुधवार को विजयादशमी के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने एक व्यापक नई जनसंख्या नीति की मांग की जो सभी के लिए समान रूप से लागू हो। भागवत ने दशहरा के मौके पर हुए आयोजन में संबोधन देते हुए कहा कि भारत में महिलाओं को स्वतंत्रता और समानता देने की भी पैरवी की। अपने भाषण में अल्पसंख्यकों और मुसलमानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीयों की मंशा किसी के मन में डर पैदा करने की नहीं थी। 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बुधवार को नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव पर महिलाओं के विकास, मातृभाषा, स्वरोजगार सहित कई विषयों पर अपनी बातें रखीं। उन्होंने नई जनसंख्या नीति को लागू करने की बात पर जोर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पर्वतारोही पद्मश्री संतोष यादव मौजूद थीं।

भागवत ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब किसी महिला ने आरएसएस के कार्यक्रम में शिरकत की है। नारी शक्ति को लेकर उन्होंने कहा कि जब तक महिलाओं की ताकत का दोहन नहीं किया जाएगा, भारत दुनिया में अपने स्थान पर नहीं पहुंच पाएगा। उन्होंने कहा कि छुआ-छूत अंधविश्वास और कट्टरता के कारण भारत पिछड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के अस्पृश्यता को जड़ से समाप्त किया जाना चाहिए।
जनसंख्या के सवाल पर भागवत बोले, "जनसंख्या संसाधनों के बिना बोझ बन जाती है। हमें सभी के लिए जनसंख्या नीति पर काम करने की आवश्यकता है।"

लेकिन उन्होंने आगे कहा कि "धर्म आधारित जनसंख्या असंतुलन एक महत्वपूर्ण विषय है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जनसंख्या असंतुलन से भौगोलिक सीमाओं में परिवर्तन होता है। जन्म दर में अंतर के साथ-साथ बल द्वारा धर्मांतरण, और घुसपैठ भी बड़े कारण हैं।"

भागवत बोले कि जनसंख्या असंतुलन से देश अलग हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वी तिमोर, कोसोवो और दक्षिण सूडान धर्मों के बीच असंतुलन के कारण नए देश बन कर उभरे हैं।  

देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति के बारे में आरएसएस प्रमुख ने कहा, "कुछ लोगों द्वारा ये डर फैलाया जा रहा है कि हमारे कारण अल्पसंख्यकों को खतरा है। यह न तो संघ का विश्वास है और न ही हिंदुओं का। संघ हमेशा से भाईचारे, सौहार्द और शांति के पक्ष में खड़ा रहा है। अमरावती और उदयपुर में हिंदुओं के सिर काटने जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए भागवत बोले कि ऐसी घटनाओं की सभी को निंदा करनी चाहिए। उन्होंने हिंदुओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे संविधान और कानून को कभी न भूलें।

भागवत ने संकट के समय में श्रीलंका तक भारत की पहुंच की सराहना की और सरकार की रूस-यूक्रेन की समानता और शांति की अपील की नीति को बरकरार रखा। उन्होंने कहा कि यह बड़े संतोष की बात है कि दुनिया उठ बैठ कर भारत की बात सुन रही है। उन्होंने कोविड -19 को लेकर सरकार के किए गए कामों की सराहना की। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि रोजगार सृजन अकेले सरकार की जिम्मेदारी नहीं थी।रोजगार के संकट को लेकर भागवत बोले कि आरएसएस ने छोटे व्यवसाय और रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद करके 275 जिलों में नौकरियों का सृजन किया है। लेकिन समाज के सभी हिस्सों को ऐसे प्रयासों का समर्थन करना होगा।" 
मातृभाषा पर दिया जोर 
आरएसएस प्रमुख ने मातृभाषा पर जोर देते हुए हिंदी का नाम लिए बगैर नई शिक्षा नीति की सराहना की। भागवत ने कहा कि हम मानते हैं कि करियर के विकास के लिए अंग्रेजी महत्वपूर्ण है। हम अपने बच्चों को अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेजते हैं। लेकिन हममें से कितने लोग अपनी मातृभाषा को महत्व देते हैं?”
आरएसएस प्रमुख ने सभी भारतीयों से उन ताकतों के खिलाफ सतर्क रहने को कहा जो भारत के लिए नुकसानदेय है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अराजकता और असंतोष फैलाना चाहते हैं। भागवत बोले कि ऐसे समय में देश के नागरिकों को प्रशासन और राज्य के पक्ष में खड़े होना चाहिए।

First Published : October 5, 2022 | 1:18 PM IST