संसदीय स्थायी समिति ने कौशल मंत्रालय को वाहन क्षेत्र में भारी कौशल अंतर को भरने के लिए विशेष परियोजनाएं संचालित करने के लिए कहा है।
कौशल मंत्रालय की प्रमुख कौशल विकास योजना की जांच के दौरान श्रम, कपड़ा और रोजगार पर संसदीय स्थायी समिति को साल की शुरुआत के दौरान कौशल मंत्रालय ने सूचित किया था कि वर्ष 2019-26 की अवधि के लिए वाहनवाहन क्षेत्र 2.9 करोड़ का विशाल कौशल का अंतर है।
37 क्षेत्रीय कौशल परिषदों (एसएससी) में से करीब 18 एसएससी ने विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध कौशल के प्रकार और भविष्य में किस तरह की नौकरियों का सृजन होगा, यह पता लगाने के लिए कौशल अंतराल अध्ययन को पूरा किया है।
संसदीय समिति को कौशल मंत्रालय ने कहा था, ‘अन्य एसएसी अपना अध्ययन पूरा करने की प्रक्रिया में हैं।’
समिति ने इस क्षेत्र में इस विशाल अंतर को पूरा करने के लिए उद्योग को भी बोर्ड में लाने के लिए कहा है। संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘यह भी उचित होगा कि वाहन क्षेत्र की कंपनियों को भी बोर्ड में शामिल किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विशेष परियोजनाएं उनकी विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।’
वाहन के बाद परिधान (86 लाख), प्रबंधन (65 लाख) और फर्नीचर और फिटिंग (44.06 लाख) हैं, जबकि उड्डयन और विमानन क्षेत्र में सबसे कम कौशल अंतर (0.67 लाख) है जिसके बाद हाईड्रोकार्बन (दो लाख), जल प्रबंधन और प्लंबिंग (3.39 लाख) और जीवन विज्ञान (8.20 लाख) है।
एसएससी को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) ने स्वायत्त उद्योग के नेतृत्व वाले निकायों के रूप में स्थापित किया है। वे व्यावसायिक मानकों और योग्यता निकायों का निर्माण करते हैं, योग्यता ढांचे का विकास करते हैं, प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन करते हैं, कौशल अंतर का अध्ययन करते हैं और उनके द्वारा विकसित राष्ट्रीय व्यावसायिक मानकों से जुड़े पाठ्यक्रम पर प्रशिक्षुओं का आकलन और प्रमाणित करते हैं। अभी 38 एसएससी कार्यरत हैं और इन एसएससी की गर्वनिंग काउंसिल में 600 से अधिक कॉरपोरेट प्रतिनिधि हैं।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में योजना शुरू होने के बाद से लगातार उच्च ड्रॉपआउट (करीब 20 फीसदी) पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। विशेष रूप से गर्भावस्था, शादी और छोटी अवधि के इन पाठ्यक्रमों के कारण महिलाओं की भागीदारी कम हो जाती है।