​शिपिंग पीपीपी से आएगी तेजी

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 5:38 PM IST

पिछले वित्त वर्ष में सुरक्षा संबंधी मंजूरी में देरी के कारण संपत्ति मुद्रीकरण प्रक्रिया में 6,000 करोड़ रुपये गंवाने के बाद बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) एक ढांचे पर विचार कर रहा है, जिसके तहत बंदरगाहों के विकास के लिए सार्वजनिक निजी हिस्सेदारी (पीपीपी) परियोजनाओं में बोली लगाने वालों को तेजी से मंजूरियां मिल सकेंगी।
मंत्रालय ने गृह, रक्षा और विदेश मंत्रालयों सहित विभिन्न विभागों को पत्र लिखकर ‘पॉजिटिव और नेगेटिव लिस्ट’ के ढांचे की मांग की है। इसके तहत पोर्ट और शिपिंग सेक्टर में सरकारी टेंडर में नियमित रूप से बोली लगाने वालों और प्रमुख कारोबारियों को सामान्य परिस्थितियों में बार-बार मंजूरी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
बंदरगाह राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत आते हैं। ऐसे में बोली लगाने वालों को  इस समय सरकार के टेंडरों में प्री-क्वालीफिकेशन के चरण में सुरक्षा जोखिम को लेकर मंजूरी लेने की जरूरत होती है। यह मंजूरी जहाजरानी मंत्रालय नहीं देता, जब तक कि गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय विदेश मंत्रालय, कैबिनेट सचिवालय और खुफिया ब्यूरो से इनपुट नहीं मिल जाता है।
मंत्रालय चाहता है कि प्रमुख उद्यमियों की एक पॉजिटिव लिस्ट और अनियमित व नई इकाइयों के लिए नेगेटिव लिस्ट बनाई जाए।
इस मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘अगर एक परियोजना में 10 से 15 बोली लगाने वाले हैं तो अगर नियमित व स्थापित कारोबारियों को स्वतः मंजूरी दे दी जाए तो और शेष को मानक दिशानिर्देशों के मुताबिक मंजूरी दी जाए तो इससे समय बचाया जा सकता है और देरी कम की जा सकती है। इसके लिए अनौपचारिक चर्चा चल रही है, जिसका प्रारूप तैयार किया जाना है। बहरहाल इसे लेकर आम राय है कि यह देरी इस सेक्टर के लिए अच्छी नहीं है।’
मौजूदा दिशानिर्देशों में विभिन्न विभागों से इनपुट्स के लिए 12 सप्ताह की अधिकतम अवधि दी गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसमें अक्सर 4 से 6 महीने वक्त लगता है और इससे  बोलियां खोलने में देरी होती है।
मंत्रालय और शिपिंग सेक्टर दोनों में ही इस बात को लेकर चिंता है कि इस  देरी से इस क्षेत्र में वैश्विक दिलचस्पी प्रभावित हो सकती है और इससे बंदरगाहों का बुनियादी ढांचे के विकास की गति घट सकती है।
मौजूदा दिशानिर्देशों के मुताबिक बोली लगाने वाले को मिली सुरक्षा मंजूरी 5 साल के लिए वैध होती है। हालांकि वैधता सिर्फ उन टेंडरों के लिए बढ़ती है, जब वह उसी पोर्ट प्राधिकरण द्वारा जारी किया गया हो। अगर कोई अलग पोर्ट उसी समय टेंडर जारी करता है तो उसके लिए नए सिरे से मंजूरी की जरूरत होगी।
2012 में केंद्र ने मंजूरी की राह में आने वाले व्यवधानों को चिह्नित किया था और इस सेक्टर के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए गए थे। इसके तरह संबंधित प्राधिकारी सभी प्री क्वालीफिकेशन बोलीकर्ताओं को 12 दिन के भीतर मामलों के आधार पर सुरक्षा मंजूरी देंगे। साथ ही अंतर मंत्रालयी समिति का भी प्रावधान किया गया था, जिसे देरी की वजह और इसे लेकर कार्रवाई पर विचार करना था।
इसके पहले बिजनेस स्टैंडर्ड ने खबर दी थी कि मंजूरी में देरी की वजह से मंत्रालय की 2021-22 की संपत्ति मुद्रीकरण योजना मूर्त रूप नहीं ले पाई, जबकि सभी 13 बंदरगाह योजना में निजी क्षेत्र दिलचस्पी ले रहा था। वित्त वर्ष के अंत में 7000 करोड़ रुपये की मुद्रीकरण योजना में सिर्फ 14 प्रतिशत मुद्रीकरण हो सका।

First Published : July 11, 2022 | 11:17 PM IST