सुब्रत को चाहिए सहारा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 6:45 AM IST

तीन बैठकों के बाद आखिरकार सुब्रत रॉय अपने गैर-बैंकिंग कारोबार सहारा इंडिया फाइनैंशियल कॉरपोरेशन को समेटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से कुछ मोहलत हासिल करने में कामयाब रहे।


दो हफ्ते पहले तक आरबीआई चाहता था कि सहारा तत्काल प्रभाव से लोगों से जमा राशि लेना बंद कर दे। अब केंद्रीय बैंक ने कहा है कि सहारा अगले तीन साल तक लोगों से जमा राशि ले सकती है, पर सात साल के अंदर उसे अपने गैर वित्तीय कारोबार को पूरी तरह से समेटना होगा।

भले ही सभी लोगों ने यह मान लिया था कि इस मामले में 60 वर्षीय सुब्रत रॉय बाजी हार चुके हैं, पर यह उनकी कारोबारी लड़ाई में दूसरी लगातार जीत है। पिछले साल जेट एयरवेज के नरेश गोयल ने सरकारी मंजूरी में देरी को वजह बताते हुए एयर सहारा को खरीदने की डील से हाथ वापस खींच लिये थे, पर सुब्रत रॉय ने उन्हें इस करार में लौटने के लिए मना ही लिया। (हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि जेट के शेयरों में आई गिरावट की वजह से गोयल के लिए एयर सहारा को खरीदना मुश्किल हो गया था।)

कारोबारी दुनिया में रॉय की कहानी अनोखी और सबसे जुदा है। उन्होंने 1978 में महज 2,000 रुपये से गोरखपुर में अपने कारोबार की शुरुआत की थी। गरीब तबके के ऐसे लोग जो बैंकिंग से जुड़े नहीं थे, उनके लिए जमा करने के विकल्प के साथ रॉय ने अपना कारोबार शुरू किया। अपने इस कारोबार का नाम उन्होंने सहारा रखा।

धीरे धीरे उनके कारोबार ने रफ्तार पकड़ी। लोग उनकी स्कीम में पैसे लगाने लगे। इसके साथ ही रॉय ने अचल संपत्ति, मीडिया और नागरिक विमानन कारोबार में अपने पंख फैलाने शुरू किए। अपने समूह को एक अलग पारंपरिक पहचान दिलाने के लिए भी उन्होंने कई कदम उठाए। कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड लागू किया गया। उन्होंने खुद को ‘प्रबंध कार्यकर्ता’ कहलाना पसंद किया और यह घोषणा भी कि उनका परिवार समूह कंपनियों से कभी भी लाभांश नहीं लेगा।

वर्ष 2004 में आरबीआई ने कहा कि जिन लोगों ने सहारा में निवेश किया है, उनके पैसे की हिफाजत को लेकर वह चिंतित है। आरबीआई ने कंपनी को आदेश दिया कि वह इन जमा राशियों में से 80 फीसदी को कम जोखिम वाले निवेश विकल्पों में लगाए, जैसे कि सरकारी बॉन्ड्स। बाद में अप्रैल, 2007 में इस सीमा को बढ़ाकर 100 फीसदी कर दिया गया।

कुछ हफ्ते पहले आरबीआई ने कहा कि उसके आदेश पर कंपनी ने पूर्ण रूप से अमल नहीं किया है और 10 फीसदी जमा राशियों को अब भी समूह की दूसरी कंपनियों में निवेश किया जा रहा है। इसी के मद्देनजर आरबीआई ने सहारा इंडिया फाइनैंशियल कॉरपोरेशन को आदेश जारी किया कि जमा लेना तत्काल बंद किया जाए। इस आदेश पर आपत्ति जताते हुए सहारा ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

उच्च न्यायालय ने आरबीआई के आदेश पर रोक लगा दी। इस फैसले पर आरबीआई ने उच्चतम न्यायालय में अपील की जहां दोनों पक्षों को बैठकर आपस में मामला सलटाने का निर्देश दिया गया। तब जाकर आरबीआई ने कहा कि वह सहारा को कुछ समय की मोहलत देती है ताकि कंपनी इस कारोबार को समेटने के लिए सभी जरूरी कदम उठा सके।

पर रॉय इस आदेश से विचलित नहीं हुए हैं। उन्होंने देश में नए टाउनशिप तैयार करने की महत्त्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा की है। साथ ही म्युचुअल फंड्स और बीमा क्षेत्र में कदम रखने के लिए भी समूह तैयारी में दिख रहा है। यह सहारा के लिए एक दरवाजा बंद होने के साथ कई दरवाजे खुलने जैसा है।

First Published : June 21, 2008 | 12:38 AM IST