कोविड महामारी और पिछले 2 साल के दौरान पुनर्बीमा कंपनियों द्वारा दरों में बढ़ोतरी की वजह से आपूर्ति की ओर से व्यवधान आया है। इससे जीवन बीमा कंपनियों के खुदरा सुरक्षा कारोबार की वृद्धि प्रभावित हुई है। इसके बावजूद सुरक्षा खंड में कुल मिलाकर बेहतर वृद्धि दर रही है। खासकर बैंकों व एनबीएफसी द्वारा कर्ज देने में इसकी मांग किए जाने के कारण क्रेडिट लाइफ बिजनेस में तेजी आई है।
निजी क्षेत्र की दो शीर्ष जीवन बीमा कंपनियों, जिन्होंने हाल में अपनी कमाई की घोषणा की है, के खुदरा सुरक्षा कारोबार में संकुचन आया है। एचडीएफसी लाइफ के पहली तिमाही के एनुअलाइज्ड प्रीमियम इक्वीवैलेंट (एपीई) में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 34 प्रतिशत की गिरावट आई है।
वहीं आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ के व्यक्तिगत सुरक्षा कारोबार में करीब 40 प्रतिशत की गिरावट आई है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल और एचडीएफसी लाइफ के प्रोटेक्शन एपीई में क्रमशः 22.2 प्रतिशत और 31 प्रतिशत वृद्धि हुई है।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ एनएस कन्नन ने एनॉलिस्ट काल के दौरान कहा, ‘महामारी के दौरान खुदरा संरक्षण कारोबार को चलाने को लेकर हमारे सामने आपूर्ति के पक्ष से चुनौतियां थीं। बहरहाल हम इस समय ऐसी स्थिति में आ गए हैं, जहां आंकड़े स्थिर हैं। तीसरी तिमाही में हम सालाना आधार पर वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं।’ एचडीएफसी लाइफ के मुख्य वित्तीय अधिकारी नीरज शाह ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘ग्रुप बिजनेस कुल मिलाकर संरक्षण वृद्धि से संचालित होता है। क्रेडिट लाइफ बिजनेस हमारे लिए साफतौर पर स्थिर कारोबार है, जो मजबूत और लाभदायक बना हुआ है। बैंकों के ऋण देने में मजबूत वृद्धि के साथ हमारा क्रेडिट लाइफ बिजनेस पिछले साल की तुलना में 90 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है।’
इंडिया फर्स्ट लाइफ इंश्योरेंस के डिप्टी सीईओ ऋषभ गांधी ने कहा, ‘वित्त वर्ष 22 की पहली तिमाही में कोविड की दूसरी लहर के दौरान खुदरा सुरक्षा पॉलिसी की बिक्री बढ़ी इस साल कोविड घटने के साथ बचत और निवेश पॉलिसी में रुझान बढ़ा है। कुछ सूचीबद्ध बीमाकर्ताओं की तरह हमने भी ऐसा पाया है। हमारा कुल मिलाकर प्रोटेक्शन पोर्टफोलियो बढ़ रहा है क्योंकि ग्रुप क्रेडिट लाइफ बढ़ा है। यह बैंकों के खुदरा कर्ज की उठान पर निर्भर होता है।’
खुदरा सुरक्षा कारोबार उस समय गति में था, जब महामारी चरम पर थी। लेकिन अंडरराइटिंग मानक सख्त होने के कारण बैलेंस शीट सही रही।
अप्रैल 2020 से मई 2022 के बीच जीवन बीमा उद्योग को कोविड संबंधी मौत के 18,135 करोड़ रुपये के 2,35,000 दावे मिले। इसमें से 2,34,000 मौत के 17,606 करोड़ रुपये के बीमा दावे निपटाए गए।
कोविड के कारण मृत्यु संबंधी दावे बढ़ रहे थे, ऐसे में पुनर्बीमा कंपनियों ने कुछ मौकों पर दरों में बढ़ोतरी कर दी। पिछले दो साल में कुछ मामलों में सावधि बीमा की कीमत में 30 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है।
बीमाकर्ताओं का कहना है कि सावधि बीमा में अब स्थिरता है और आने वाले समय में इसके मूल्य में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने जा रहा है। साथ ही कुछ बड़े कारोबारी जैसे एचडीएफसी लाइफ और आईसीआईसीआई लाइफ ने जोखिम उठाने की सीमा बढ़ाई है, ऐसे में कुल मिलाकर खुदरा सुरक्षा की लागत कम होगी।