ताज एयरपोर्ट की उड़ान में देरी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 11:44 AM IST

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में 3,500 करोड़ रुपये का प्रस्तावित ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट हब अब राष्ट्रमंडल खेलों (वर्ष 2010) तक लोगों के लिए उपलब्ध नहीं हो पाएगा।


वजह- केंद्र ने यूपी सरकार की इस महात्वाकांक्षी परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। परियोजना को लेकर शुरू से ही विवाद रहा है, क्योंकि नियमानुसार 150 किलोमीटर के दायरे में दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नहीं बनाया जा सकता, जबकि दिल्ली में पहले से ही इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मौजूद है।

हालांकि बाद में सरकार की ओर से कहा गया कि परिस्थितियों को ध्यान में रखकर 250 किमी के दायरे में दूसरा हवाई अड्डा बनाने की अनुमति दी जा सकती है। बावजूद इसके जेवर में प्रस्तावित एयरपोर्ट परियोजना की फाइल मंजूरी के लिए लंबे समय से केंद्रीय मंत्रीमंडल के पास अटकी पड़ी है। यूपी के मुख्य सचिव और आईडीसी अतुल कुमार गुप्ता ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि जेवर एयरपोर्ट का मसला सिविल एविएशन के महानिदेशक के पास नहीं, बल्कि कैबिनेट के पास लंबित है और बार-बार इस मसले पर बात करने के बाद भी अब तक कोई हल नहीं निकल पाया है।

गौरतलब है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर 2001 से ही विवाद शुरू हो गया था। हालांकि यूपी सरकार की ओर से कैबिनेट सेक्रेटरी से मिलकर इस परियोजना से जुड़ी तमाम शंकाओं को दूर करने का प्रयास किया गया। इसके साथ ही कैबिनेट सेक्रेटरी को कहा गया कि भविष्य में और कोई जानकारी चाहिए, तो उसे यूपी इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की सचिव अर्चना अग्रवाल मुहैया कराएंगी। उल्लेखनीय है कि 3500 करोड़ की लागत से बनने वाला यह एयरपोर्ट विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त भारत में अपने तरह का अनूठा हवाई अड्डा होगा।

गुप्ता ने कहा कि मंजूरी में देरी से प्रस्तावित एयरपोर्ट राष्ट्रमंडल खेलों तक पूरा नहीं हो सकता। दिलचस्प बात यह है कि इस परियोजना के लिए निविदा जारी करने संबंधित सभी कागजात तैयार हैं, लेकिन खुद राज्य सरकार को भी पता नहीं है कि यह परियोजना कब तक शुरू हो पाएगी। हालांकि अग्रवाल कहती हैं कि राज्य सरकार की इच्छा है कि यह एयरपोर्ट राष्ट्रमंडल खेलों तक पूरा हो जाए, जिससे यात्रियों को आने-जाने में सुविधा हो सके।

दरअसल, इस परियोजना को मायावती के कार्यकाल में 2003 को एयरपोर्ट प्राधिकारण से प्राथमिक मंजूरी मिली थी और जब मायावती दोबारा सत्ता में आई हैं, तब वे इस परियोजना को पूरा कराने के लिए पूरा जोर लगा रही हैं। इस मेगा परियोजना को सरकार-सार्वजनिक साझेदारी (पीपीपी) के तहत तैयार किया जाना है और इसके लिए 1500 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण करने का अनुमान है। एयरपोर्ट में कार्गो और यात्रियों के लिए दो अलग-अलग रन-वे होंगे। इसके साथ ही इसके चारों ओर कॉमर्शियल, रिहाइशी और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स भी विकसित करने की योजना है।

First Published : July 17, 2008 | 12:06 AM IST