कारों की कीमत में 10,000 से 15,000 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है।
ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि केंद्रीय यातायात मंत्रालय सभी कारों में अनिवार्य रूप से स्पीड गवर्नर लगाए जाने की सिफारिश की योजना बना रहा है। अभी तक स्पीड गवर्नर का नियम केवल व्यावसायिक वाहनों के लिए ही है।
यातायात मंत्रालय ने इस बारे में 6 अगस्त को सभी राज्यों के यातायात मंत्रियों की बैठक बुलाई है। बैठक में सभी तरह के वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाए जाने के मुद्दे पर चर्चा होगी, वहीं सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल (सीएमवीआर) बिल में संशोधन पर भी विचार किया जाएगा।
अगर बिल में प्रस्तावित संशोधन संसद में पास हो जाता है, तो हर तरह के वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य हो जाएगा। स्पीड गवर्नर एक ऐसा उपकरण है, जो वाहन की गति को नियंत्रित करता है। यानी कि प्रशासन की ओर से तय वाहनों की गति से ज्यादा तेज चलने पर स्पीड गवर्नर गति पर अंकुश लगाने का काम करता है। वर्तमान में 1989 में बने सीएमवीआर के तहत केवल व्यावसायिक वाहनों में ही स्पीड गवर्नर की अनिवार्यता है।
हालांकि सभी वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाए जाने का नियम बनाने पर राज्य और केंद्र के बीच इस मुद्दे पर विवाद है कि इसकी निगरानी कौन करेगा। बिल में संशोधन के जरिए केंद्र की योजना है कि इस कानून को अमलीजामा पहनाने के लिए राज्यों को जागरूक किया जाए। इस बाबत केंद्र सरकार की ओर तमिलनाडु के यातायात मंत्री के.एन. नेहरू की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है, जो तमाम मसलों पर विचार कर अपनी सिफारिश केंद्र को सौपेगी।
शिपिंग, सड़क यातायात और राजमार्ग के संयुक्त सचिव सरोज कुमार दास का कहना है कि मंत्रियों की आगामी बैठक में इस मुद्दे को रखा जाएगा और स्पीड गवर्नर लागू करने पर जोर दिया जाएगा। वर्ष 2002 में जब केंद्र की ओर से सभी राज्यों के वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने की बात कही गई थी, तो केवल दिल्ली, केरल और कर्नाटक में ही इसे लागू किया जा सका था। दरअसल, ज्यादातर राज्य चाहते हैं कि स्पीड गवर्नर लगाने और उसकी निगरानी का काम केंद्र सरकार देखे।
इस मुद्दे पर जब ऑटोमोबाइल निर्माताओं से बात की गई, तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। मल्टी स्पीड गियर लिमिटेड के निदेशक अनिल गुप्ता ने बताया कि अगर सभी वाहनों में स्पीड गवर्नर अनिवार्य कर दिया जाए, तो इसकी लगात भी कम आएगी। यानी जो स्पीड गवर्नर अभी 15,000 रुपये में मिलता है, वह 10,000 रुपये में उपलब्ध होगा। हालांकि स्पीड गवर्नर की अनिवार्यता से वाहनों की कीमतें भी प्रभावित होंगी। मारुति 800 जैसी छोटी कार की कीमतों में तकरीबन 5 फीसदी का इजाफा हो सकता है, जबकि वैगन आर और हुंडई सैंट्रो की कीमत 3 से 4 फीसदी बढ़ सकती है।
दिल्ली ट्रांसपोर्ट विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उच्च गुणवत्ता वाले स्पीड गवर्नर बनाने वाले बहुत कम संख्या में उपलब्ध हैं। यही वजह है कि स्पीड गवर्नर की कीमत वर्तमान में बहुत ज्यादा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सभी वाहनों में स्पीड गवर्नर की अनिवार्यता लागू करना राजनीतिक मुद्दा भी बन सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि अगर स्पीड गवर्नर का नियम सभी राज्यों में लागू नहीं होता है, तो वाहन चालकों को दूसरे राज्यों में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में इस नियम को प्रभावी ढंग से सभी राज्यों में लागू कराना जरूरी है।
सभी राज्यों के वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने की हो रही है तैयारी
कारों की कीमतों में हो सकता है 10,000 से 15,000 रुपये का इजाफा