एक दोस्त के साथ शुरू किया सफर उन्हें बादशाहत की ओर ले गया और जब उनकी बादशाहत शबाब पर थी तो 52 साल की उम्र में अचानक उन्होंने एक दूसरे दोस्त को अपना ताज सौंप कर एक नए सफर की शुरुआत कर दी।
और सफर भी ऐसा, जिसकी मंजिल बैराग है। गेट्स ने प्रतिज्ञा की है कि वह 26.10 खरब रुपये की अपनी पूरी दौलत जरूरतमंदों पर लुटा देंगे, अपने बच्चों पर नहीं। पूरी दुनिया को चौंकाने की यह बेमिसाल अदा वही शख्स दिखा सकता है, जो दुनिया को बदलने की कुव्वत रखता हो और खुद बेमिसाल हो। और इसमें कोई दो राय नहीं कि बिल गेट्स वैसे ही शख्स हैं।
यह गेट्स ही थे, जिन्होंने दुनिया के कोने-कोने में लोगों और घरों तक कंप्यूटर पहुंचा कर ग्लोबल विलेज का सपना साकार कर दिया। लेकिन दुनिया जब बदल गई तो बेमिसाल बिल गेट्स ने शुक्रवार को माइक्रोसॉफ्ट से लॉग आउट करके एक नई पारी के लिए लॉग इन कर दिया। ठीक 32 साल पहले 1976 में उन्होंने अपने एक दोस्त पॉल एलेन के साथ यह कंपनी शुरू की थी।
इसे दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी कंपनी का दर्जा दिलाकर और खुद दुनिया के सबसे अमीर शख्स का सबसे ऊंचा शिखर पाकर उन्होंने इसके चेयरमैन पद से इस्तीफा देकर पुराने दोस्त स्टीव बॉल्मर को यह जिम्मेदारी सौंप दी। बॉल्मर इस विरासत को दूसरे अहम पद पर बैठे रे ओजी के साथ मिलकर संभालेंगे। गेट्स कंपनी से नॉन एक्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में जुड़े रहेंगे लेकिन कामकाज सिर्फ हफ्ते में एक ही दिन करेंगे।
बादशाह की दास्तां
1975 में दोस्त पॉल एलेन के साथ मिलकर बनाया एक प्रोग्रामिंग एमआईटीएस नाम की एक कंपनी को दिखाई, जिससे खुश होकर कंपनी ने उन्हें अपने यहां नौकरी दे दी। इस दौरान दोनों ने खुद ही अपनी कंपनी बनाने का फैसला किया, जिसे 1976 में उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट नाम से रजिस्टर्ड कराया।
कंपनी बनने के बाद सफलता की पहली सीढ़ीं उन्हें तब मिली, जब आईबीएम ने उन दोनों से पीसी के लिए बेसिक इंटरप्रेटर बनाने का काम सौंपा। साथ ही, आईबीएम ने उन्हें कंप्यूटर के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम भी बनाने का जिम्मा भी दे दिया।
माइक्रोसॉफ्ट ने किसी और सॉफ्टवेयर कंपनी द्वारा विकसित 86 डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम को 50 हजार डॉलर में खरीदकर उसमें काफी फेरबदल कर उसे पीसी-डॉस के नाम से आईबीएम को बेच दिया। लेकिन गेट्स इस बात के लिए आईबीएम को मनवाने में कामयाब हो गए कि प्रॉडक्ट का कॉपीराइट माइक्रोसॉफ्ट के पास ही रहेगा और यही वह समझदारी थी, जिसने बिल गेट्स को कंप्यूटर की दुनिया के बादशाह बनने के लिए रास्ता साफ कर दिया। जब बाजार में आईबीएम के मुकाबले में दूसरी कंपनियों ने पीसी के नए-नए मॉडल उतारे तो उन्हें भी यह ऑपरेटिंग सिस्टम बेचकर गेट्स ने दोनों हाथों से माल बटोरना शुरू कर दिया।
फिर आया गेट्स की बादशाहत की ताजपोशी का वक्त, जब उन्होंने विंडोज के नाम से नया ऑपरेटिंग सिस्टम ईजाद किया। यह वह सिस्टम था, जिसने न सिर्फ जटिल कंप्यूटर को बच्चों का खेल बनाकर घर-घर में पहुंचा दिया बल्कि आईटी इंडस्ट्री को दुनिया की बड़ी ताकत के रूप में स्थापित कर दिया।
1999 में बिल गेट्स की बादशाहत का जलजला शबाब पर था, जब उनकी झोली में कुल 101 अरब डॉलर की संपत्ति थी, जिसने उन्हें दुनिया के सबसे अमीर शख्स का रुतबा हासिल करवा दिया। उनका रुतबा 2007 तक कायम रहा लेकिन इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट के शेयर गिरने और बड़ी तादाद में मोटी रकमें परोपकारी संस्थाओं को दान देने के कारण इस सूची में वह खिसक कर थोड़ा नीचे आ गए।
क्या है माइक्रोसॉफ्ट की सल्तनत की तकदीर?
वैसे तो जिस मुकाम पर गेट्स माइक्रोसॉफ्ट को छोड़कर जा रहे हैं, वह आईटी की दुनिया की सबसे बड़ी सल्तनत का मुकाम है और माना जा रहा है कि हाल-फिलहाल बुरा दौर तो इस सल्तनत के आस-पास भी नहीं फटक सकता। क्योंकि इस क्षेत्र की अन्य बड़ी सल्तनतें आकार में इसके मुकाबले बहुत छोटी हैं।
आलम यह है कि माइक्रोसॉफ्ट की कमाई याहू और गूगल, दोनों की संयुक्त कमाई से भी ज्यादा है। लेकिन यह भी सच है कि गूगल और एप्पल का तेजी से बढ़ता दबदबा आईटी में माइक्रोसॉफ्ट की सल्तनत को नेस्तनाबूद करने की कुव्वत भी रखता है, भले ही देर से सही। अब यह देखना वाकई दिलचस्प होगा कि गेट्स के बिना माइक्रोसॉफ्ट अपनी सल्तनत को कितने दिनों तक बरकरार रख पाती है।
कौन हैं स्टीव बॉल्मर?
स्टीव बॉल्मर 1980 में माइक्रोसॉफ्ट और बिल गेट्स से उस वक्त जुड़े थे, जब कंपनी आईबीएम को अपना पहला ऑपरेटिंग सिस्टम बेचकर सफलता की पहली सीढ़ी पर खड़ी थी। गेट्स के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कंपनी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाते हुए बॉल्मर ने 1998 में कंपनी का अध्यक्ष पद संभाला। फिर 2000 में गेट्स ने सीईओ पद छोड़कर बॉल्मर को सौंप दिया और खुद कंपनी के चेयरमैन बन गए।
जब पॉल एलेन और मैंने कंपनी की शुरुआत की थी तो हमारी आंखों में एक ख्वाब था। ऐसा ख्वाब, जिसमें हम देखते थे कि दुनिया के हर घर और हर डेस्क पर कंप्यूटर होगा। अब जब यह ख्वाब काफी हद तक पूरा हो गया है तो देख कर अचंभा होता है। – बिल गेट्स