टोल टैक्स व सर्विस टैक्स पर सरकार के साथ सहमति बनने के बाद ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है।
सरकार ने टोल टैक्स की वर्तमान दर पर एक साल के लिए रोक लगाते हुए 1 दिसंबर, 2007 से पहले की दर से टोल टैक्स की वसूली का फैसला किया है। अब ट्रांसपोर्टर्स को पहले के मुकाबले 80 पैसे कम की दर से प्रति किलोमीटर टोल टैक्स अदा करना होगा। सरकार टोल टैक्स संबंधी मामलों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाएगी।
इस कमेटी में एनएचएआई के सदस्य व सरकारी नुमाइंदों के साथ मोटर कांग्रेस के छह सदस्य होंगे। साथ ही, सरकार ने तेल कंपनियों को लिखित रूप से निर्देश दिया है कि ट्रक व अन्य मालवाहक वाहनों को प्रीमियम डीजल खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाए। सरकार ने ट्रांसपोर्टर्स को सेवा कर में भी राहत देने का फैसला किया है।
केंद्र सरकार इस बात पर भी राजी हो गयी है कि आने वाले समय में डीजल पर लगने वाले कर में उसकी कीमत में बढ़ोतरी के अनुपात में बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। इन तमाम मुद्दों पर गुरुवार देर रात मोटर कांग्रेस के पदाधिकारियों व केंद्र सरकार के नुमाइंदों के बीच सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल 2 जुलाई को शुरू हुई थी। जिसमें देश भर के 45 लाख से अधिक मालवाहक वाहनों के शामिल होने का अनुमान था।
कितना है टोल टैक्स
वर्तमान में ट्रांसपोर्टर्स 2.40 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से टोल टैक्स अदा कर रहे थे। जो अब 1.60 रुपये प्रति किलोमीटर हो गया है। एक साल तक इसमें कोई इजाफा नहीं होगा।
क्या है डीजल टैक्स
फिलहाल यह होता है कि अगर डीजल की मूल कीमत में पांच फीसदी की बढ़ोतरी होती है तो टैक्स में भी पांच फीसदी की बढ़ोतरी हो जाती है।
सेवा कर कितना
सेवा कर गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसी द्वारा किए गए कुल चार्ज का 25 फीसदी होगा। इसके अलावा उनसे वस्तुओं की ढुलाई के नाम पर कोई अतिरिक्त कर नहीं लिया जाएगा।
कार व स्कूटर ढोने वाले भारी वाहन को राहत
सरकार ने कार व स्कूटर ढोने वाले भारी वाहनों को केंद्रीय मोटर वाहन कानून (सीएमवीआर) की परिधि में लाने का फैसला किया है। अधिक भार ढोने के कारण इन वाहनों में अतिरिक्त चक्के लगे होते है और आए दिन माल ढोने के दौरान इन वाहनों पर जुर्माना किया जाता है। सीएमवीआर की परिधि में आने के बाद इस प्रकार के वाहन पर कोई जुर्माना नहीं किया जाएगा।
ट्रांसपोर्टर तो जीते, मगर लोग नहीं!
सरकार से सहमति के बाद ट्रांसपोर्टर्स को उनकी लागत में 30 से 50 फीसदी तक का फायदा होने जा रहा है। लेकिन क्या वे इसका फायदा उपभोक्ता को देंगे, इस सवाल पर ऑल इंडिया मोटर कांग्रेस के अध्यक्ष चरन सिंह लोहारा मांग व पूर्ति के सिध्दांत की बात करने लगते हैं।
पेट्रोल व डीजल के दाम में अभी हाल में हुई बढ़ोतरी के बाद मालभाड़े में इजाफे की शोर पर भी वे पूर्ण विराम लगा देते हैं। इस सवाल पर वे कहते हैं कि ट्रांसपोर्टर्स ने कोई मालभाड़ा नहीं बढ़ाया है। और डीजल की कीमत में बढ़ोतरी का माल भाड़े के बढ़ने से कोई ताल्लुक नहीं है। यहां भी मांग व पूर्ति के नियम का पालन होता है। हड़ताल के लिए इस समय को चुनने, जब सरकार पर महंगाई के साथ सत्ता विहीन होने का खतरा मंडरा रहा है, के बारे में लोहारा क हते हैं कि उनकी भी मजबूरी थी।
4 जुलाई से टोल टैक्स में कमी कर दी गयी। यह 2.40 रुपये के बदले 1.60 रुपये प्रति किलोमीटर हो गया। यानी कि 33 फीसदी की कमी। ट्रांसपोर्टर्स को इसी दर से फायदा तो सरकारी राजस्व से इसी दर से नुकसान। ट्रक मालिक जहां महीने में औसतन 10,000 रुपये का टोल टैक्स देते थे अब 6700 रुपये देंगे। इसके अलावा उन्हें सेवा कर में राहत दी गयी है। कुल मिला कर उनकी लागत 50 फीसदी तक कम हो जाएगी। हालांकि यह हर राज्य में अलग-अलग होगा। जहां बिक्री कर अधिक है, वहां इनकी लागत अधिक होगी। लेकिन वे इस फायदे में उपभोक्ता को हिस्सेदारी नहीं देने जा रहे हैं।
उनका कहना है कि इसी असहनीय लागत के कारण तो उन्होंने हड़ताल की थी। ट्रांसपोर्टर्स के मुताबिक मांग कम होने की स्थिति में वे अपने आप भाड़े में कमी कर देंगे। वे यह भी कहते हैं कि उनके क्षेत्र में भाड़े में कोई एकरूपता नहीं है। 50 टन माल को कोई ट्रांसपोर्टर्स 10,000 रुपये में ले जाता है तो कोई इस काम के लिए 9,000 रुपये ही लेता है।