मुंबई बारिश से डूब गयी है। चेन्नई में ईंधन संकट गहराने लगा है। कई मोर्चों पर कारोबार पर काले बादल मंडरा रहे हैं। उस पर कोढ़ में खाज की तर्ज पर ट्रकवालों ने भी हड़ताल का ऐलान कर दिया है।
बुधवार से होने वाली ट्रांसपोर्टरों की इस देशव्यापी हड़ताल से अरबों रुपये के कारोबार के चौपट होने की आशंका बन गयी है। बाजार व व्यापार की इस प्रतिकूल परिस्थिति में कारोबारियों की सुनने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। और आए भी कैसे, जब देश के कर्ता-धर्ता खुद अपनी कुर्सी बचाने के लिए जोड़-तोड़ में लगे हुए हैं। ऐसे में कारोबारी भला जाएं तो जाएं कहां।
बड़ी गहरी लगेगी चपत
2 जुलाई से ट्रक, लॉरी, टाटा-407 व माल ढोने वाली अन्य गाड़ियों को मिलाकर कुल 48 लाख वाहन हड़ताल पर जा रहे है। इन सबों के हड़ताल पर जाने से अनुमान के मुताबिक रोजाना 400 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। यह राशि सिर्फ इन वाहनों की रोजाना की कमाई से जुड़ी है। एक ट्रक महीने भर में कम से कम 15-20 हजार रुपये की कमाई तो कर ही लेता है। इस लिहाज से भी देखा जाए तो एक दिन में 500-700 रुपये का नुकसान होगा। इसी तरह सरकार को भी रोजाना करोड़ों के राजस्व का नुकसान होगा। दिल्ली-मुंबई मार्ग पर एक ट्रक सिर्फ टोल टैक्स के रूप में 6400 रुपये सरकार को अदा करता है।
डीजल कारोबार भी होगा स्याह
लंबे रूट वाला एक ट्रक रोजाना 75-80 लीटर डीजल की खपत करता है तो सामान्य रूट वाला 50 लीटर तक। ऑल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसोसिएशन के मुताबिक हड़ताल से डीजल की बिक्री 35 फीसदी तक प्रभावित हो जाएगी। पेट्रोल पंप वालों के साथ सरकार को करों के रूप में मिलने वाले राजस्व का घाटा होगा। डीजल की प्रति लीटर कीमत में 40 फीसदी सरकारी टैक्स शामिल होता है।
महंगाई में लगेगा ‘तड़का’
सभी मंडियों में सब्जी व फल की रोजाना आवक में भारी कमी आ जाएगी। सिर्फ दिल्ली की आजादपुर मंडी में रोजाना 4000 ट्रकों की आवाजाही होती है। एक ट्रक पर 10-15 टन माल होता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हड़ताल से सब्जी व फलों की आपूर्ति किस हद तक प्रभावित होगी। दिल्ली के सदर बाजार में रोजाना लगभग 500 ट्रकों से सामान उतरता है तो लगभग इतने ही ट्रक से सामान दिल्ली के बाहर के लिए लोड किये जाते हैं। कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के मुताबिक ट्रांसपोर्टर्स की हड़ताल से सिर्फ दिल्ली में हर दिन लगभग 100 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हो सकता है।
किससे करें फरियाद
एटमी डील के विरोध में वाम दलों की धमकी से परेशान सरकार अपनी सत्ता बचाने में लगी है। इनकी सुनने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। ये किसी मंत्री से मिलने की कोशिश कर रहे हैं तो उन्हें पीए से ही मिलकर संतोष करना पड़ रहा है।
प्रीमियम की जबरदस्ती से होने लगा है पेट्रोल संकट
प्रीमियम पेट्रोल बेचने की बाध्यता के कारण चेन्नई में पेट्रोल का संकट हो गया है। प्रीमियम पेट्रोल सामान्य पेट्रोल के मुकाबले 4 रुपये प्रति लीटर महंगा होता है। राजस्थान में भी इस प्रकार का संकट पैदा हो गया था लेकिन कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर्स के उपाध्यक्ष (नार्थ) सुमीत बगई के मुताबिक अब वे कुल तेल का 20 फीसदी हिस्सा प्रीमियम के रूप में बेचेंगे। दिल्ली के पेट्रोलियम ट्रेडर्स ने प्रीमियम की शर्तों से परेशान हो बुधवार को अपनी बैठक बुलाई है।