ट्रूकॉलर को मिलेगी कड़ी टक्कर

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 3:06 PM IST

प्रस्तावित नए दूरसंचार कानून के कारण ट्रूकॉलर को भारतीय बाजार में तगड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। भारत उसके लिए काफी मायने रखता है क्योंकि यहां उसका 70 फीसदी वै​श्विक ग्राहक आधार है। भारतीय दूरसंचार विधेयक के मसौदे में उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए कई उपाय किए गए हैं। इसके तहत फोन करने वाले की पहचान को दूरसंचार नेटवर्क पर उजागर करने की बात कही गई है। दूसरे शब्दों में, यदि कोई आपको फोन करेगा तो उसका नाम आपके मोबाइल फोन पर स्पष्ट तौर पर दिखेगा। फिलहाल पहचान के तौर पर केवल फोन नंबर ही हैंडसेट पर दिखता है।  
मसौदे पर दूरसंचार विभाग द्वारा तैयार व्याख्यात्मक टिप्पणी में कहा गया है, ‘हरेक दूरसंचार उपयोगकर्ता यह जानना चाहता है कि उसे कौन फोन कर रहा है। इससे दूरसंचार सेवाओं के जरिये होने वाली साइबर धोखाधड़ी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। इसलिए इस विधेयक में पहचान संबंधी प्रावधानों को उपयुक्त जगह पर शामिल किया गया है।’
संचार मंत्री अ​श्विनी वैष्णव ने कहा कि यह सेवा न केवल दूरसंचार ऑपरेटरों के मोबाइल कॉल के लिए उपलब्ध होगी ब​ल्कि इसके दायरे में ओटीटी संचार सेवाएं (व्हाट्सऐप, टेलीग्राम आदि) भी होंगी। इसे मोबाइल फोन और ओटीटी संचार सेवाओं के बीच भी समर्थ किया जाएगा। उन्होंने कहा​ कि मसौदा कानून में बताया गया है कि उपयोगकर्ताओं का यह कर्तव्य होगा कि वे सत्यापन के लिए सही केवाईसी जानकारी दें ताकि इसे सफल बनाया जा सके। इसे सुनि​श्चित करने के लिए कानून में किसी भी उल्लंघन के लिए सख्त सजा का प्रावधान होगा।
मसौदा विधेयक में कहा गया है कि दूरसंचार सेवाओं का लाभ उठाने वाले किसी व्य​क्ति द्वारा धारा 4 की उप-धारा 7 के तहत आवश्यक पहचान को गलत तरीके से प्रस्तुत करने पर उसे एक साल की कैद अथवा 50,000 रुपये जुर्माना या दूरसंचार सेवाओं के निलंबन का सामना करना पड़ सकता है। इसे संज्ञेय एवं क्षमा योग्य यानी दोनों तरह का अपराध बनाया गया है।
दूरसंचार ऑपरेटरों का कहना है कि इसके लिए प्रमुख नेटवर्क पर डेटा स्टोर करना होगा। उनका कहना है कि डेटा स्टोर करने में करीब एक साल का समय लग सकता है क्योंकि इसके लिए सरकार को स्पष्ट नियम भी तैयार करना आवश्यक होगा। इसके अलावा दूरसंचार कंपनियों के बीच इंटरकनेक्ट समझौते पर हस्ताक्षर करने होंगे और ऑपरेटरों के बीच इसका परीक्षण भी करना होगा। जाहिर तौर पर इसके 
लिए अतिरिक्त निवेश एवं सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होगी। एक दूरसंचार कंपनी के वरिष्ठ अ​धिकारी ने कहा, ‘ऐसा किया जा सकता है क्योंकि इसके लिए केवाईसी पर मौजूद ग्राहकों के नाम का इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनियों के लिए भी ऐसा किया जा सकता है क्योंकि बल्क नंबर के लिए उन्हें एक साझा कॉलर लाइन पहचान (सीएलआई) दी जा सकती है। नि​श्चित तौर पर इससे साइबर और कॉल धोखाधड़ी में नाटकीय तौर पर कमी आएगी। लेकिन सवाल यह है कि इसके ​लिए निवेश की जरूरत होगी। कई लोगों का कहना है कि उन्हें मुआवजा चाहिए अथवा लागत का भार ग्राहकों के कंधों पर डाला जाना चाहिए।’

First Published : September 23, 2022 | 11:04 PM IST