डीजल की कीमत बढ़ते ही पूरे देश भर में ट्रकों के भाड़े में बढ़ोतरी को लेकर हाय-तौबा मचा दी गयी थी। लेकिन असलियत कुछ और है।
रेलवे की मार एवं भारी प्रतिस्पर्धा के कारण ट्रक एसोसिएशन ने मालभाड़े में बढ़ोतरी नहीं करने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि माल ढोने के मामले में रेलवे के मुकाबले उनकी लागत काफी अधिक है।
रेलवे को जहां टोल टैक्स, सेल्स टैक्स, रोड टैक्स व डीजल सेस जैसे करों से छूट मिली हुई है वहीं उन्हें इस प्रकार के करों से रोजाना जूझना पड़ता है। लोग मालों की ढुलाई के लिए रेलवे को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। इसके अलावा बीते पांच सालों के दौरान ट्रकों की संख्या दोगुनी हो जाने से उनके बीच प्रतिस्पर्धा भी काफी बढ़ गयी है। ऐसी स्थिति में माल भाड़े में बढ़ोतरी उन्हें खुद के पैर पर कुल्हाड़ी मारने सरीखा लग रहा है।
3 लाख ट्रकों की सदस्यता वाली ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पदाधिकारी डी.के. शर्मा कहते हैं, ‘हम कीमत बढ़ाने की सोच भी नहीं सकते हैं। लोगों ने इसे लेकर खूब प्रचार किया लेकिन किसी ने ट्रांसपोर्टरों के हालात का जायजा नहीं लिया।’ अगर वे अपने भाड़े में बढ़ोतरी करते हैं तो उनकी मांग और कम हो जाएगी।
ट्रकों का मालभाड़ा पहले से ही रेलवे के मुकाबले डेढ़ फीसदी तक अधिक है। इसके अलावा उनके टोल टैक्स या रोड टैक्स में बढ़ोतरी हो जाती है तो उनकी लागत बढ़ जाती है। उनके मुताबिक दिल्ली से मुंबई जाने वाले ट्रक को टोल टैक्स के नाम पर 6500 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। इसके अलावा उन्हें डीजल भराने पर प्रति लीटर 1.50 रुपये का सेस देना पड़ता है।
ट्रकर्स वेलफेयर सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष कुलतरन सिंह अटवाल कहते हैं, ‘हमारी आपसी प्रतिस्पर्धा भी कम नहीं है। बीते पांच सालों में ट्रकों की संख्या दोगुनी हो गयी।’ डीजल के साथ मशीनरी के दाम बढ़ने के बावजूद पांच सालों से भाड़े में बढ़ोतरी नहीं की गयी है। ट्रकों की क्षमता भी 6 टन माल ढोने से बढ़कर 10 टन हो गयी है।
ट्रक वाले जा सकते हैं हड़ताल पर
ट्रक एसोसिएशन का यह भी कहना है कि अगर सरकार टोल टैक्स में कमी नहीं करती है तो वे 2 जुलाई को देशव्यापी हड़ताल पर जा सकते हैं। उनका कहना है कि भारी भरकम टोल टैक्स के कारण उनकी लागत बढ़ जाती है और वे रेलवे से मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं।
बिक्री कर घटने का मिल रहा फायदा
ट्रक मालिक उन राज्यों में डीजल भरवा रहे हैं जहां बिक्री कर कम कर दिया गया है। उन राज्यों की तेल खपत काफी अधिक हो गयी है जहां बिक्री कर में कमी की गयी। दिल्ली के ट्रकों के ईंधन इन दिनों हरियाणा व उत्तर प्रदेश में भरे जा रहे हैं।