तकनीक के प्रयोग से मिलेगी रफ्तार

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 6:10 PM IST

सरकारी विभागों ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को लागू करने के वक्त में करीब 3 से 4 महीने की कमी लाने के लिए प्रधानमंत्री गतिशक्ति की डिजिटल तकनीक पहल का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग विभाग के अधिकारी और सरकारी एजेंसियों जैसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने गुजरात की भास्कराचार्य नैशनल इंस्टीट्यूट फार स्पेस ऐप्लीकेशंस ऐंड जियो इन्फॉर्मेटिक्स (बीआईएसएजी-एन) की कार्यशाला में शामिल होकर 5 एक्सप्रेसवे का डिजिटल मसौदा तैयार करना शुरू कर दिया है। डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर काम को अंतिम रूप दिए जाने के बाद परियोजना को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के स्तर पर ले जाया जाएगा।
डीपीआर किसी परियोजना की विस्तृत योजना होती है। इसमें योजना, डिजाइन, जोखिम, जरूरी संसाधनों की जरूरत और काम शुरू करने की अवधि आदि शामिल होता है। व्यवहार्यता के पहले के स्तर पर परियोजना के लिए तालमेल, डीपीआर तैयार करने के पहले का अहम हिस्सा है।
डेवलप प्रोजेक्ट अलाइनमेंट में बड़ी लागत व समय की जरूरत होती है, क्योंकि सर्वे की टीम को जमीनी स्तर पर उपस्थित होने और प्रक्रिया को भौतिक स्तर पर पूरा करना होता है। केंद्र सरकार द्वारा गतिशक्ति पर जोर देने और डिजिटल पोर्टल के इस्तेमाल को नैशनल मास्टरप्लान के रूप में भी जाना जाता है। डिजिटल रूप से तालमेल 1 सप्ताह से कम समय में बिठाया जा सकता है, अन्यथा इस काम में 3 से 4 महीने लग जाते हैं। अधिकारियों ने कहा कि इससे सर्वे की भारी भरकम लागत बचेगी।
उपरोक्त उल्लिखित अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘मंत्रालयों ने गतिशक्ति नैशनल मास्टरप्लान का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। यह तकनीक की ताकत है और सरकार साथ मिलकर काम कर रही है, जिससे पीएम गतिशक्ति के माध्यम से बदलाव लाया जा सके।’
नैशनल मास्टरप्लान पोर्टल ने अंतरविभागीय मंजूरियों के लिए भी सरकार ने साधन मुहैया कराना शुरू कर दिया है। उदाहरण के लिए इस नए पोर्टल के माध्यम से वन मंजूरी भी ऑनलाइन ली जा सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल अक्टूबर में गतिशक्ति नैशनल मास्टरप्लान की घोषणा की थी।
वित्त मंत्रालय के दिशानिर्देशों के मुताबिक अप्रैल में सरकारी विभाग व मंत्रालय सभी सार्वजनिक वित्तपोषित परियोजनाओं की जांच करेंगे, जिनका बजट आवंटन 500 करोड़ रुपये से ज्यादा हैं। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि इस तरह की सभी परियोजनाओं के लॉजिस्टिक्स व कनेक्टिविटी जैसे कामों  को मंत्रिमंडल की मंजूरी से पहले पूरा किया जा सके।

First Published : June 20, 2022 | 1:01 AM IST