मानसून के सक्रिय होते ही धरती फटने की एक दर्जन से ज्यादा घटनाएं घटने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार को भूजल दोहन रोकने और जल रीचार्ज संबंधी कानून की याद आई है।
दिलचस्प बात यह है कि अभी तक खुद ही सो रही सरकार अब प्रदेश की जनता को इस बाबत नींद से जगाने के लिए बाकायदा जनजागगण अभियान भी चलाएगी। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में धरती फटने का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है।
मंगलवार की रात भी कानपुर देहात, चित्कूट, प्तापगढ़ और इलाहाबाद में भी जमीन 3 से 5 फुट तक फटने की घटना देखी गयी है। इससे पहले भी लखनऊ, इलाहाबाद, हमीरपुर, भदोही, रायबरेली और इटावा में जमीन दरकने से लेकर फटने की घटना सामने आई थी।
इन घटनाओं पर सरकार ने कड़ी चिंता जताते हुए चीफ सेक्रेटरी अतुल गुप्ता से रिपोर्ट मांगी थी। गुप्ता ने भूवैज्ञानिकों से बात कर व प्भावित इलाकों का दौरा करने के बाद जो रिपोर्ट दी है, उसमें भूजल दोहन पर कानून बनाने की जरूरत बतायी गयी है। साथ ही आवास विभाग ने 200 वर्गमीटर के भूखंडो के लिए नक्शा पास करने के लिए वाटर रीचार्ज की व्यवस्था का होना अनिवार्य कर दिया है। पहले यह सीमा 300 वर्ग मीटर थी।
भूजल विभाग ऐसे ही ही एक कानून का मसौदा सरकार को पहले ही सौंप चुका है। भूजल विभाग के निदेशक एम.एम. अंसारी ने बिानेस स्टैंडर्ड से बातचीत में यह माना कि भूजल के अंधाधुंध दोहन के चलते बहराइच जिले को छोड़कर ज्यादातर जगहों पर यह खतरे के निशान से नीचे जा पहुंचा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती फटने का एक कारण जमीन के नीचे हो रही भौगोलिक उथल-पुथल भी है। इसके चलते सरकार को इन जगहों की आबादी को सुरक्षित जगह पर बसा देना चाहिए।
70 में से 69 जिलों में भूजल स्तर खतरे का निशान से भी नीचे चला गया है और विशेषज्ञों का मानना है कि इन जिलों में बोरिंग का काम रोक देना चाहिए क्योंकि बिना रीचार्ज के इनका सफल हो पाना मुश्किल काम होगा। सबसे खराब हालत पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड की है, जहां बीते 10 सालों में भूजल का जबरदस्त दोहन हुआ है। भूजल विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक बहराइच को छोड़कर सारे जिलों में भूजल का स्तर खतरे की सीमा पार कर चुका है।
राजधानी लखनऊ के कई ऐसे इलाके हैं, जहां पिछले पांच सालों में 100 फीसदी भूजल का दोहन हुआ है। बुंदेलखंड में किसानों को बोरिंग की सुविधा देने वाले टयूबवेल प्रोजेक्ट कॉर्पोरेशन व जल निगम के अधिकारियों का मानना है कि इस इलाके में अब बोरिंग आसान काम नहीं रहा है।
महोबा, ललितपुर, मऊरानीपुर , चरखारी और झांसी के कई इलाकों में तो भूजल का स्तर 7-8 मीटर के सामान्य स्तर के मुकाबले गिर कर 70 मीटर तक जा पहुंचा है, जो कि जल्दी ही इन इलाकों को मानव आबादी के रहने लायक नहीं छोड़ेगा।