आरबीएल बैंक का शेयर सोमवार को 22.45 प्रतिशत गिरकर 87.9 रुपये पर आ गया था। बैंक ने सप्ताहांत के दौरान घोषणा की थी कि आरबीआई ने तीन साल के लिए नए प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी के तौर पर आर सुब्रमण्यकुमार की नियुक्ति को स्वीकृति प्रदान की है। उन्होंने और राजीव आहूजा (उसके अंतरिम एमडी व सीईओ) ने मनोजित साहा के साथ बातचीत में निवेशकों को निरंतरता का आश्वासन दिया और परिसंपत्ति गुणवत्ता से जुड़ी चिंताओं पर विस्तार से बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश:
आपकी त्वरित प्राथमिकताएं क्या हैं?
सुब्रमण्यकुमार: पहली प्राथमिकता आरबीएल टीम को संपूर्ण बनाना है। मैं इस टीम का हिस्सा हूं। बैंक ने शानदार वृद्धि की है। हमें यह देखना होगा कि इस वृद्धि का लाभ कैसे उठाया जा सकता है। बैंक पहले ही महत्वपूर्ण पत्र तैयार कर चुका है, ऐसे प्रमुख क्षेत्रों की पहचान कर चुका है जिनकी पहचान किए जाने की जरूरत है। यह तकनीकी-स्वीकृत बैंक है। हमें यह देखना होगा कि यह प्रौद्योगिकी ग्राहकों की वॉलेट भागीदारी बढ़ाकर मजबूत बनाई जा सकती है। एजेंडे पर आरबीएल बैंक 2.0 के लिए कार्य योजना तैयार करना भी शामिल है। बैंक ने पिछले दशक में शानदार वृद्धि दर्ज
की है।
आपने आरबीएल 2.0 में कौन से क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है?
कुमार: हमें उन क्षमताओं पर बरकरार रखने की जरूरत होगी, जिनका पिछले दशक में बैंक ने लाभ उठाया है। इसके अलावा वृद्धि के लिए पर्याप्त पूंजी भी उपलब्ध है। पूंजी की उपलब्धता और फिर पोर्टफोलियो में विविधता लाना जरूरी है। 2.0 के आखिर में तीन से पांच साल में हम तकनीक-केंद्रित बैंक बनने की स्थिति में होंगे।
जब यह शेयर 20 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया, तो आपने निवेशकों को क्या संदेश दिया है?
कुमार: प्रमुख बाजार भी नीचे आए हैं। सबसे पहले मैं निवेशकों को यह बताना चाहूंगा कि उन्हें बैंक के संबंध में अपनी धारणा बदलनी होगी, क्योंकि यह एक स्तर से दूसरे की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है।
राजीव आहूजा: हमने 1.0 के कई पहलुओं को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया। 1.0 के आधार ने 2.0 को बढ़ावा दिया। इसका मकसद अन्य खुदरा व्यवसाय विकसित करना है, जिनमें ग्रामीण उपस्थिति और वाहन वित्त का विस्तार करना भी शामिल है। हम कार्ड और माइक्रोफाइनैंस के विशेष व्यवसायों और तकनीकी संदर्भ में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बनाई गई बढ़त को कायम रखने की कोशिश करेंगे। कुमार का लगाव बेहद लाभकारी होगा, क्योंकि वह जटिल और बड़े फ्रैंचाइजी की दक्षता, खासकर रिटेल, सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों, कृषि और ग्रामीण उपस्थिति की दक्षता से जुड़े हुए हैं। इन क्षेत्रों में काम करने का उनका अनुभव वाकई बैंक के लिए महत्वपूर्ण होगा।
क्या बाजार नए एमडी और सीईओ की नियुक्ति को बैलेंस-शीट क्लीन-अप के संकेत के तौर पर देख रहा है?
कुमार: यदि आप मार्च की बैलेंस शीट देखें तो शुद्ध एनपीए 1.3 प्रतिशत है और प्रावधान कवरेज अनुपात 70 प्रतिशत। परिसंपत्ति गुणवत्ता नेतृत्व बदलाव के लिए कोई शर्त या अनिवार्यता नहीं थी। परिसंपत्ति गुणवत्ता की बाजार धारणा गलत है।
आपका अगला मुख्य बिंदु पूंजी पर्याप्तता अनुपात है जिसका इस्तेमाल वृद्धि के लिए किया जा सकेगा, जबकि मुनाफे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा
आहूजा: हमने पास पिछले कई साल से कोई ज्यादा बदलाव पर जोर नहीं दिया है। हमारा शुद्ध पुनर्गठित बहीखाता 2.6 प्रतिशत पर है जो इस उद्योग में सबसे कम में से एक है।