भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने देश में पंजीकृत सात रेटिंग एजेंसियों में से एक ब्रिकवर्क रेटिंग्स इंडिया का मान्यता प्रमाण पत्र आज रद्द कर दिया। बाजार नियामक ने अपने आदेश में कहा कि ब्रिकवर्क रेटिंग एजेंसी के तौर पर अपने कर्तव्यों को पूरा करने और अतीत में दंड मिलने के बाद भी सुधार करने में नाकाम रही है। ब्रिकवर्क के प्रवर्तकों में केनरा बैंक भी शामिल है।
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य अश्विनी भाटिया ने कहा, ‘रेटिंग एजेंसी के रूप में ब्रिकवर्क उचित कौशल और तत्परता दिखाने में विफल रही है, जिससे विनियम के मूल उद्देश्य यानी निवेशकों के हितों की सुरक्षा और प्रतिभूति बाजारों का व्यवस्थित विकास प्रभावित हुए हैं। सेबी को निरीक्षणों के दौरान बार-बार चूक का पता चला है और पहले लगाया गया जुर्माना कारगर साबित नहीं हुआ।
साथ ही कंपनी प्रमाणित रेटिंग एजेंसी के परिचालन की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रही है।’ उन्होंने कहा, ‘मेरे विचार से इस समस्या को दूर करने और बाजार के तंत्र की रक्षा करने के लिए सख्त नियामक कार्रवाई की जरूरत है।’
रेटिंग एजेंसी के अधिकारियों ने कहा कि लाइसेंस रद्द करने का असर बैंकिंग उद्योग पर भी पड़ सकता है। एक अधिकारी ने कहा कि ब्रिकवर्क ने जिन निवेश साधनों की रेटिंग की है, उसे अन्य रेटिंग एजेंसियों से रेटिंग लेनी होगी। और इनमें से कई की रेटिंग घटाई जा सकती है।
विशषज्ञों ने कहा कि रेटिंग एजेंसी के खिलाफ अप्रत्याशित सख्त कार्रवाई से बाजार में अच्छा संकेत जाएगा, रेटिंग मानदंड में सुधार होगा तथा रेटिंग में गड़बड़ी पर भी रोक लगेगी।
प्रमाणित रेटिंग एजेंसियों को वित्तीय बाजार का पहरेदार कहा जाता है और बाजार में निवेश करते समय निवेशक उनकी रेटिंग पर भरोसा करते हैं। ब्रिकवर्क ने 2008 में प्रमाणित रेटिंग एजेंसी का लाइसेंस हासिल किया था और अप्रैल 2014 से सेबी ने इसके खिलाफ कई बार जांच की थी।
जनवरी 2020 में सेबी और भारतीय रिजर्व बैंक ने साथ मिलकर ब्रिकवर्क की जांच की, जिसमें कई अनियमितताएं पाई गईं। इसके बाद सेबी ने प्रशासनिक चेतावनी जारी करते हुए खामियां दूर करने के लिए सुधार के उपाय करने के निर्देश दिए थे। अप्रैल 2021 में सौंपी गई जांच रिपोर्ट में ब्रिकवर्क के खिलाफ कई प्रतिकूल बातें कही गईं।
इसके बाद रेटिंग एजेंसी का लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की गई थी। इन खामियों में समुचित रेटिंग प्रक्रिया का पालन नहीं करने, रेटिंग देते समय जांच-परख में विफल रहने, सही खुलासा नहीं करने और हितों के टकराव जैसी प्रतिकूल बातें सामने आईं। जुलाई 2021 में सेबी को कर्नाटक उच्च न्यायालय से नोटिस भी मिला था, जहां ब्रिकवर्क ने अपना लाइसेंस रद्द किए जाने की सिफारिश को चुनौती दी थी।
इसके बाद सेबी ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका दायर की। पिछले महीने सर्वोच्च न्यायालय ने सेबी को ब्रिकवर्क का लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई पूरी करने की इजाजत दे दी थी।
सेबी ने ब्रिकवर्क को छह महीने के अंदर अपना काम समेटने और ग्राहकों को इसके बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया था। इस दौरान ब्रिकवर्क को नए ग्राहक जोड़ने से भी मना किया गया था।
इससे पहले बाजार नियामक ने भूषण स्टील द्वारा डिबेंचर भुगतान में चूक का पता लगाने में देर करने और गायत्री प्रोजेक्ट्स के डिबेंचर की रेटिंग घटाने में विफल रहने जैसी अनियमितताएं देखकर रेटिंग एजेंसी पर जुर्माना लगाया था।