बीएसई एफएमसीजी इंडेक्स नई ऊंचाई के करीब पहुंच गया है क्योंकि घटती इनपुट कीमतें और पिछले दो साल से कमजोर प्रदर्शन ने निवेशकों को इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया है। यह इंडेक्स कंज्यूमर स्टेपल स्टॉक के प्रदर्शन की जानकारी देता है।
बीएसई एफएमसीजी इंडेक्स गुरुवार को 14,789 पर बंद हुआ, जो अक्टूबर 2021 के पिछले उच्चस्तर से महज 4 फीसदी कम है। बीएसई ऑटो के बाद यह क्षेत्र बीएसई के 19 क्षेत्रीय सूचकांकों में दूसरा सूचकांक बनने जा रहा है, जो नई रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने वाला है।
एफएमसीजी कंपनियों के लिए मुख्य इनपुट पाम तेल की घटती कीमतों ने पिछले कुछ हफ्तों में एफएमसीजी शेयरों की ओर खरीदारी का रुझान पैदा किया है। इसके अलावा हाई बीटा शेयरों से ज्यादा सुरक्षित कंपनियों की ओर बढ़ने से भी मदद मिली।
इक्विनॉमिक्स के संस्थापक जी चोकालिंगम ने कहा, तेल की कीमतों में गिरावट इस क्षेत्र के लिए बड़ा सकारात्मक रहा है। यह इस क्षेत्र की अग्रणी एचयूएल के प्रदर्शन में प्रतिबिंबित हुआ है। मुझे इस क्षेत्र के लिए कोई बड़ा अवरोध नहीं दिख रहा क्योंकि कच्चे माल की कीमत घट रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मॉनसून के कारण बेहतरी दिख सकती है।
पिछले दो साल में बीएसई एफएमसीजी इंडेक्स ने बेंचमार्क निफ्टी के मुकाबले अच्छे खासे अंतराल के साथ कमजोर प्रदर्शन किया है। इसकी वजह वॉल्यूम में सुस्त बढ़ोतरी थी, जो आंशिक तौर पर कमजोर ग्रामीण मांग के चलते थी। एफएमसीजी कंपनियों के राजस्व व लाभ में बढ़ोतरी मुख्य रूप से कीमत बढ़ोतरी के कारण हुई। कमजोर प्रदर्शन से इस क्षेत्र का पीई गुणक काफी नीचे आ गया।
इलारा सिक्योरिटीज ने एक नोट में कहा, आय में संशोधन की धीमी रफ्तार के माहौल में हम इस क्षेत्र को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां मजबूत आय की संभावना के साथ मार्जिन की सुरक्षा है।
इस साल अब तक के लिहाज से बीएसई एफएमसीजी इंडेक्स 7 फीसदी चढ़ा है जबकि निफ्टी में 7 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि पिछले दो साल में एफएमसीजी इंडेक्स 30 फीसदी चढ़ा है जबकि निफ्टी में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
जून तिमाही की आय और प्रबंधन की टिप्पणी एफएमसीजी शेयरों की आगे की राह तय कर सकती है।
कंज्यूमर स्टेपल कंपनियां सालाना आधार पर बिक्री में 20 फीसदी और तिमाही दर तिमाही 5 फीसदी की बढ़त दर्ज कर सकती हैं, साथ ही लाभ में सालाना आधार पर 27 फीसदी और तिमाही आधार पर 4 फीसदी की उछाल दर्ज कर सकती हैं। उनका परिचालन मार्जिन करीब 24 फीसदी पर बने रहने की उम्मीद है।
विश्लेषकों को उम्मीद है कि कच्चे माल की घटती कीमतों का फायदा अगली दो तिमाहियों में दिखेगा।
स्वतंत्र बाजार विश्लेषक अंबरीश बालिगा ने कहा, कच्चे माल की कीमतें एक साल पहले बढ़नी शुरू हुई। पिछली कुछ तिमाहियों में एफएमसीजी कंपनियां अपनी कीमत बढ़ाने में सक्षम हुई हैं। मोटे तौर पर बढ़ती लागत का भार उपभोक्ता पर डालने के मामले में एक या दो तिमाही का अंतर रहता है। इस बीच, जब उनका मार्जिन सुस्त हुआ तो शेयर टूटे जबकि बाजार का प्रदर्शन कुल मिलाकर बेहतर रहा। कच्चे माल की कीमतें अब सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुकी हैं, ऐसे में मार्जिन आने वाले समय में सुधरेगा क्योंकि खुदरा कीमतें कम नहीं होंगी।
सामान्य मॉनसून की पृष्ठभूमि में ग्रामीण मांग को लेकर आशावाद भी एक एफएमसीजी शेयरों की खरीदारी की एक अन्य वजह है। बालिगा ने कहा, सामान्य मॉनसून की उम्मीद से संभावना जताई जा रही है कि ग्रामीण मांग मजबूत होगी और मार्जिन बढ़ेगा क्योंकि इनपुट लागत कम होगी। इसके परिणामस्वरूप एफएमसीजी शेयरों में दोबारा रुझान देखने को मिला है।