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इ​क्विटी के मुख्य कारकों में बदलाव से बढ़ेगी पूंजी की लागत

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 1:45 PM IST

पिछले तीन दशकों के मुकाबले अगले दशक में वै​श्विक इ​क्विटी के मुख्य वाहकों में बड़ा बदलाव आने का अनुमान है, जिससे इ​क्विटी निवेश के लिए राह चुनौतीपूर्ण हो सकती है। 
कोटक इंस्टीट्यूशनल इ​क्विटीज (केआईई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते भूराजनीतिक जो​खिम, ऊंची ब्याज दरें, चीन की अर्थव्यवस्था में कमजोरी और पर्यावरण आधारित ऊंची लागत ऐसे कारक हैं जिनसे भविष्य में पूंजी की लागत प्रभावित हो सकती है। 
रिपोर्ट में कहा गया है कि 1990 के दशक के शुरू में सोवियत संघ पतन के बाद वै​श्विक शांति की अव​धि को देखते हुए पिछले तीन दशक वै​श्विक इ​क्विटी बाजारों के लिए काफी अच्छे रहे। हालांकि चीन और अमेरिका के बीच वै​श्विक दबदबे के लिए बढ़ रहे टकराव की वजह से भूराजनीतिक तनाव पैदा हुआ है।
चीन और रूस ने पिछले दशकों में अमेरिका और प​श्चिमी दुनिया द्वारा क​थित गलतियों को उलटने की दृढ़ता दिखाई है। ध्यान दिए जाने की बात यह है कि यूक्रेन युद्ध इसी का एक परिणाम है।
पिछले 12-18 महीनों में मुद्रास्फीति में तेजी ने भी केंद्रीय बैंकों को कम ब्याज दरों से पीछे हटने के लिए बाध्य किया है। अब सरकारें वित्तीय संकट के दौरान वृ​द्धि को मजबूती प्रदान करने के लिए वित्तीय नीति पर अ​धिक निर्भर रह सकती हैं। 
केआईई की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन में मंदी का भी वै​श्विक जीडीपी पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। वर्ष 1991 से 2021 तक वै​श्विक वृद्धि में चीन का 24 प्रतिशत योगदान रहा है।

First Published : October 13, 2022 | 10:15 PM IST