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भारत में खपत प्रभावित होने की आशंका नहीं

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 4:22 PM IST

खपत आधारित शेयरों पर ज्यादा दबाव पड़ने की आशंका नहीं है, क्यों​कि खासकर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र की कंपनियां अगली कुछ तिमाहियों के दौरान लागत को तर्कंसंगत बनाने पर जोर दे रही हैं। विश्लेषकों का कहना है कि वेरिएबल भुगतान और बोनस में विलंब काफी हद तक आईटी सेक्टर तक ही सीमित होगा।  

इ​क्विनोमिक्स रिसर्च के संस्थापक एवं मुख्य निवेश अ​धिकारी जी चोकालिंगम का कहना है, ‘आईटी कंपनियों के लिए कर्मचारी लागत में बड़ा इजाफा हुआ है। इस तरह का इजाफा मैंने पिछले साल में नहीं देखा।’ उन्होंने कहा कि उद्योग भविष्य में कर्मचारी लागत तर्कसंगत बनाने में सफल रहेगा, क्योंकि सभी बड़ी और मझोले आकार की कंपनियों में इस तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘राजस्व (डॉलर संदर्भ में) आईटी कंपनियों के लिए पिछली कुछ तिमाहियों में महज 3-4 फीसदी बढ़ा, जो इन कंपनियों द्वारा चुकाए गए कर्मचारी वेतन के मुकाबले काफी अलग है। आईटी सेक्टर बड़े सेवा उद्योग का हिस्सा है, जिसमें मानव संसाधन मुख्य कच्चा माल है। दूरसंचार और बीएफएसआई जैसे सेवा क्षेत्र में अन्य कंपनियों के लिए मानव संसाधन कुल लागत ढांचे का ज्यादा बड़ा हिस्सा नहीं है।’

रिपोर्टों से पता चलता है कि पिछले कुछ दिनों के दौरान, प्रमुख आईटी कंपनियों – इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और विप्रो  ने अपने कर्मचारियों को वेरिएबल भुगतान में विलंब किया है। रिपोर्टों के अनुसार, विप्रो में सी-सुइट लेवल पर वेरिएबल भुगतान नहीं मिलेगा, जबकि फ्रेशर और टीम लीडर के बीच कर्मचारी ग्रेड 70 फीसदी वेरिएबल भुगतान हासिल करेंगे। समान कदम टीसीएस द्वारा उठाया गया था, जिससे वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही में वरिष्ठ कर्मचारियों के लिए वेरिएबल भुगतान में विलंब हुआ।

भारतीय उद्योग जगत द्वारा घो​षित तिमाही आंकड़ों के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि कर्मचारी लागत हाल में समाप्त हुई तिमाही में बढ़कर 3.46 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो सालाना आधार पर 13.36 फीसदी की वृद्धि है। आईटी कंपनियों के लिए, कर्मचारी लागत तेजी से बढ़ी है और यह जून 2022 तिमाही में सालाना आधार पर 20.3 प्रतिशत तक बढ़कर 1.02 लाख करोड़ रुपये पर रही।

कर्मचारियों के हाथ में ज्यादा पैसा आने का मतलब है खर्च में इजाफा होना। वहीं बाजारों ने इस घटनाक्रम पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई और खपत आधारित कई शेयरों ने 2022 में अच्छा प्रदर्शन किया। आंकड़े से पता चलता है कि पिछले 6 महीनों में निफ्टी कंजम्पशन सूचकांक 12 फीसदी चढ़ा, जबकि निफ्टी-50 सूचकांक में 3 फीसदी की तेजी आई। 

आईडीबीआई कैपिटल के शोध प्रमुख ए के प्रभाकर का कहना है कि खपत आधारित क्षेत्रों का मजबूत प्रदर्शन बरकरार रहेगा, क्योंकि कर्मचारी लागत नियंत्रण के प्रयास आईटी क्षेत्र तक केंद्रित रहेंगे। 

First Published : August 23, 2022 | 10:24 PM IST