पिछले दो संवत वर्ष डेट निवेशकों के लिए अच्छे नहीं रहे। हालांकि संवत 2079 डेट म्युचुअल फंड योजनाओं के निवेशकों के लिए ज्यादा बढि़या रह सकता है। डेट एमएफ पिछले कुछ वर्षों में मुद्रास्फीति को मात देने में संघर्ष करने के बाद बड़ा बदलाव दर्ज कर रहे हैं। कई डेट फंड श्रेणियों की यील्ड-टु-मैच्युरिटी से इनके प्रतिफल चार्ट से अगली दीवाली ज्यादा बेहतर रहने का संकेत दिख रहा है।
मौजूदा समय में, लगभग हरेक फंड श्रेणी (चाहे यह लिक्विड फंड जैसी अल्पावधि फंड योजना हो या गिल्ट जैसी दीर्घावधि योजना) द्वारा मुद्रास्फीति के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करने और बैंक सावधि जमाओं से कुछ हद तक अच्छा प्रतिफल देने की संभावना है। वैल्यू रिसर्च के आंकड़े से पता चलता है कि दर वृद्धि की वजह से, अल्पावधि फंडों का वाईटीएम 6-7 प्रतिशत पर पहुंच गया है, जबकि दीर्घावधि फंडों के लिए यह 7-8 प्रतिशत पर है।
इसके अलावा, डेट फंडों को कम ब्याज दर जोखिम का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि कुछ ब्याज दर संबंधित बदलाव इस साल हो सकते हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि आरबीआई एक या कई दर वृद्धि के बाद दरों को यथावत बनाए रखेगा।
मौजूदा परिवेश के आधार पर उन्हें संभावना है कि आरबीआई 2022-23 की दूसरी छमाही में रीपो दर 6.5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं करेगा। मौजूदा समय यह दर 5.9 प्रतिशत है। ब्याज दर में वृद्धि का बॉन्ड कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है और इसलिए डेट फंड प्रतिफल भी दर वृद्धि के समय हर बार प्रभावित हुआ है।