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Electoral Bonds: SBI को देना होगा एक-एक बॉन्ड का हिसाब, SC के आदेश से शेयर 3 फीसदी के अपर सर्किट पर बंद

Electoral Bonds: सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना को सूचना के अधिकार और अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन घोषित किया।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- February 15, 2024 | 8:14 PM IST

SBI Share Price Today: राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए चुनावी बॉन्ड (Electoral Bonds) की जानकारी साझा करन के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद BSE पर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के शेयरों की ट्रेडिंग को तीन प्रतिशत के अपर सर्किट पर बंद कर दिया गया था। इसी के साथ बैंक के शेयर 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर 763.90 रुपये पर पहुंच गया।

SBI का शेयर 52-सप्ताह के नए शिखर पर

गुरुवार को, SBI के शेयर 746.70 रुपये के भाव पर खुले और BSE पर 743.35 रुपये के पिछले बंद स्तर के मुकाबले लगभग तीन प्रतिशत बढ़कर 763.90 रुपये के नए 52-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गए। कारोबार के अंत में BSE पर शेयर 2.46 प्रतिशत बढ़कर 761.60 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बंद हुए।

6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा MCap वाली बनी दूसरी PSU कंपनी

इस महीने अब तक शेयर लगभग 17 प्रतिशत बढ़ गया है, जो जनवरी 2022 के बाद से इसका सबसे बड़ा मासिक लाभ है। दिसंबर के बाद से, यह लगभग 33 प्रतिशत बढ़ गया है, जो तीन महीने से भी कम समय में मजबूत वृद्धि दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, SBI ने हाल ही में 6 लाख करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण (MCap) को पार कर लिया है और LIC के बाद इस मील के पत्थर को हासिल करने वाली दूसरी PSU कंपनी बन गई है।

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चुनावी बॉन्ड योजना ‘असंवैधानिक’- सुप्रीम कोर्ट

चुनावी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने और राजनीतिक निर्णयों पर कॉर्पोरेट योगदान के प्रभाव को कम करने के लिए आज एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विवादास्पद चुनावी बॉन्ड योजना को ‘असंवैधानिक’ करार दिया। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड योजना को सूचना के अधिकार और अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन घोषित किया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कॉरपोरेट्स को असीमित योगदान की इजाजत देना मनमाना है और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ है।

SBI साझा करे चुनावी बॉन्ड से चंदा लेने वाले दल की जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI को आदेश दिया कि बैंक 12 अप्रैल, 2019 से अब तक चुनावी बॉन्ड के माध्यम से चंदा प्राप्त करने वाले राजनीतिक दलों का विवरण चुनाव आयोग को प्रस्तुत करेगा। इसके अलावा, अदालत ने चुनाव आयोग को 31 मार्च, 2024 तक अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर सभी विवरण पब्लिश करने का भी निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि जो चुनावी बॉन्ड भुनाए नहीं गए हैं, उन्हें वापस कर दिया जाना चाहिए।

First Published : February 15, 2024 | 8:14 PM IST