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फेड की दर वृद्धि से मंदी की आशंका बढ़ी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 6:12 PM IST

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने चार दशक की ऊंचाई पर पहुंच चुकी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने पर जोर दिया है औरअपने इन प्रयासों को पूरी तरह से सही ठहराया है। मई के लिए अनुमान से खराब मुद्रास्फीति रिपोर्ट से फेडरल रिजर्व को अपनी बेंचमार्क उधारी दर बुधवार को तीन-चौथाई अंक तक बढ़ाने में मदद मिली। मई में महंगाई का आंकड़ा एक साल पहले से 8.6 प्रतिशत तक चढ़ गया, जो 1981 के बाद से सबसे बड़ी तेजी है। वर्ष 1994 से केंद्रीय बैंक ने अपनी प्रमुख दर में एक बार में इतनी ज्यादा वृद्धि नहीं की थी।
पिछले शुक्रवार की मुद्रास्फीति रिपोर्ट तक, कारोबारियों और अर्थशास्त्रियों ने बुधवार को सिर्फ आधा प्रतिशत की दर वृद्धि का अनुमान जताया था। इसके अलावा कई और वृद्धि का अनुमान जताया जा रहा है।
फेडरल रिजर्व अर्थव्यव्यवस्था पर कोई प्रभाव डाले बगैर मुद्रास्फीति को नियंत्रित कर 2 प्रतिशत के लक्ष्य पर लाना चाहता है, जो चुनौतीपूर्ण और जो​खिमपूर्ण है।
प्रत्येक दर वृद्धि का मतलब है उपभोक्ताओं और व्यापारियों के लिए ज्यादा उधारी लागत आना। प्रत्येक बार ऋण लेनदारों को महंगी दरें मिलेंगी, जिसकी वजह से खर्च, रोजगार वृद्धि और कुल आ​र्थिक क्षमता में कमजोरी आएगी।
धीमी आ​र्थिक वृद्धि का जिक्र करते हुए पॉवेल ने बुधवार को कहा, ‘आगे बढ़ने के लिए हमारे पास विकल्प मौजूद है। यह आसान नहीं है। यह ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। यह हमेशा चुनौतीपूर्ण रहेगा। फेडरल रिजर्व 1990 के दशक से ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के प्रबंधन में सफल नहीं रहा है।’ स्टेट स्ट्रीट ग्लोबल एडवायजर्स में मुख्य अर्थशास्त्री सिमोना मोकुटा की नजर में मंदी का जो​​खिम अभी शायद 50-50 है। बुधवार को फेड ने अनुमान जताया था कि अर्थव्यवस्था इस साल करीब 1.7 प्रतिशत बढ़ेगी, जो 2.8 प्रतिशत की वृद्धि से काफी कम है। फेड ने मार्च में 2.8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जताया था। उसे वर्ष के अंत में बेरोजगारी का औसत आंकड़ा 3.7 प्रतिशत के निचले स्तर पर बने रहने का अनुमान है।

First Published : June 17, 2022 | 12:32 AM IST