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इस हफ्ते देसी शेयर बाजार में भी दिख सकता है उतार-चढ़ाव

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 4:12 PM IST

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल के बयान का सोमवार को देसी शेयर बाजार में असर दिख सकता है। पॉवेल ने संकेत दिया था कि कुछ समय तक ब्याज दरें उच्च स्तर पर बनी रहेंगी। इससे उधारी दर में नरमी आने की उम्मीद धूमिल हुई है।
 

शुक्रवार को पॉवेल के बयान के बाद एसऐंडपी 500 सूचकांक 3.4 फीसदी तक लुढ़क गया था। घरेलू शेयर बाजार भी इस साल अमेरिकी शेयर बाजार के अनुरूप ही कारोबार कर रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों को डर है कि बाजार में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ सकती है।
 

जैकसन हॉल में दिए गए भाषण में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन ने मुद्रास्फीति को काबू में लाने के लिए प्रतिबद्धता जताते हुए इस बात को दोहराया था कि सितंबर में दर में असामान्य तौर पर एक और बड़ी बढ़ोतरी संभव है। उन्होंने कहा, ‘हमें मुद्रास्फीति के सहज दायरे में आने तक दर में बढ़ोतरी जारी रखने की जरूरत है।’पिछले हफ्ते सेंसेक्स और निफ्टी एक फीसदी से ज्यादा नीचे आया था लेकिन अभी भी यह जून के अपने निचले स्तर से करीब 15 फीसदी ऊपर बना हुआ है।
 

अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट्ट ने कहा, ‘बाजार अब 100 आधार अंक की बढ़ोतरी का अनुमान लगा रहा है। फेडरल रिजर्व का रुख भी सतर्क है और उसने दरें उच्च स्तर पर बनाए रखने का इरादा जताया है। यही वजह है कि अमेरिकी बाजार में गिरावट आई है। ऐसे में बाजार में उतार-चढ़ाव आएगा क्योंकि अचानक आए बदलाव को समायोजित करने में बाजार को थोड़ा समय लगेगा लेकिन जल्द ही ​स्थिति ठीक हो जाएगी।’ 
 

फेडरल रिजर्व द्वारा दरों में मामूली बढ़ोतरी और उसके बाद वृद्धि पर विराम लगाने की आस से पिछले दो महीनों में वै​श्विक शेयर बाजारों में अच्छी तेजी देखी गई। हालांकि फेड ने लंबे समय तक दरें उच्च स्तर पर बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई है जिससे बाजार में फिर से बिकवाली बढ़ सकती है।
 

जियोजीत फाइनैं​शियल सर्विसेज में मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजय कुमार ने कहा, ‘फेड प्रमुख के अति सतर्क रुख का शेयर बाजार पर अल्पाव​धि में प्रतिकूल असर पड़ सकता है।’ देसी शेयर बाजार में अक्टूबर 2021 से जनवरी 2022 के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 32 अरब डॉलर से ज्यादा की बिकवाली की थी। लेकिन ​पिछले दो महीनों में वे शुद्ध लिवाल रहे। विदेशी निवेशकों ने जुलाई से अब तक शेयर बाजार में 55,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है। हालांकि फेड प्रमुख के हालिया बयान से एफपीआई का निवेश प्रभावित हो सकता है।
 

मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज में रिटेल शोध प्रमुख सिद्धार्थ खेमका ने कहा, ‘फेड के बयान में वृद्धि के बजाय मुद्रास्फीति पर जोर रहने के संकेत दिए गए है। पॉवेल ने कहा कि मुद्रास्फीति लंबे समय तक उच्च स्तर पर बनी रह सकती है, इसलिए मौद्रिक रुख सख्त बनाने की जरूरत है। यह शेयर बाजार के लिए नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।’ 

First Published : August 29, 2022 | 2:38 PM IST