म्युचुअल फंडों की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) में वृद्धि की रफ्तार मौजूदा वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही के दौरान कमजोर रही। भारत में म्युचुअल फंडों के संगठन (एम्फी) द्वारा जारी आंकड़े से पता चलता है कि उद्योग की औसत एयूएम वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही में 2 प्रतिशत बढ़कर 39 लाख करोड़ रुपये हो गईं।
पूर्ववर्ती वित्त वर्ष 2022 के दौरान, उद्योग की एयूएम वित्त वर्ष 2021 के मुकाबले 20 प्रतिशत बढ़ी थी। पहली छमाही में धीमी वृद्धि, इक्विटी प्रवाह में नरमी और बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह माना जा रहा है कि उद्योग के लिए वृद्धि का आंकड़ा कमजोर रह सकता है।
पहली छमाही के दौरान वृद्धि में नरमी डेट फंडों से हुई निकासी, इक्विटी योजनाओं में घट रहे शुद्ध प्रवाह की वजह से है। वित्त वर्ष 2023 की पहली छमाही में निफ्टी50 सूचकांक 3 प्रतिशत फिसला, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 में 1.7 प्रतिशत की तेजी आई।
पहले पांच महीनों में, निवेशकों ने डेट योजनाओं से 16,100 करोड़ रुपये निकाले और सक्रिय इक्विटी योजाओं में 56,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया। हालांकि सक्रिय इक्विटी योजनाओं में निवेश जून के बाद से घटा है।
फंड-वार एयूएम आंकड़े के विश्लेषण से पता चलता है कि कुछ फंड हाउसों अच्छी वृद्धि दर्ज करने में सक्षम रहे हैं। शीर्ष-10 में, एसबीआई एमएफ भी शामिल है जिसकी एयूएम में 5.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ और उसे चार्ट पर अपनी बढ़त बनाने में मदद मिली। शीर्ष-10 रैंकिंग में कुछ बदलाव आए, क्योंकि कोटक महिंद्रा एमएफ और आदित्य एमएफ एक-एक पायदान नीचे आए और निप्पॉन इंडिया एमएफ दो पायदान ऊपर चढ़ा तथा फिर से शीर्ष-5 में जगह बनाने में कामयाब रहा।
शीर्ष-10 से अलग 13 ऐसे फंड हाउस थे जिन्होंने अपनी एयूएम में दो अंक की वृद्धि दर्ज की। क्वांट एमएफ, नवी एमएफ और पीजीआईएम इंडिया एमएफ तीन सर्वाधिक तेजी से बढ़ने वाले फंड हाउस रहे, क्योंकि इनकी एयूएम में 30 प्रतिशत से ज्यादा इजाफा दर्ज किया गया। एम्फी के ताजा एयूएम आंकड़े में दो नए फंड – व्हाइटओक एमएफ और सैमको एमएफ शामिल हुए हैं।