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मजबूती की राह पर पैसिव फंड

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 6:45 PM IST

पैसिव फंड उद्योग को बाजार नियामक सेबी से राहत मिली है, ऐसे में उद्योग की कंपनियों को लग रहा है कि उनकी प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां पांच से साल से भी कम समय में दोगुनी हो जाएगी। बाजार नियामक ने मार्केट मेकिंग, न्यू फंड ऑफर और डेट एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों से जुड़े कई नियमों में ढील दी है।
अभी पैसिव योजनाओं (जिसमें ईटीएफ व इंडेक्स फंड शामिल होते हैं) का एयूएम 5.27 लाख करोड़ रुपये है, जो म्युचुअल फंड उद्योग की कुल प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) से 15 फीसदी कम है।
ईटीएफ ऐसे फंड होते हैं, जो सूचकांकों मसलन निफ्टी या सेंसेक्स या अंतर्निहित परिसंपत्तियां मसलन सोने को ट्रैक करते हैं। ईटीएफ के अवयव तब बदलते हैं जब अंतर्निहित इंडेक्स का दोबारा संतुलन होता है। इनकी खरीद या बिक्री स्टॉक एक्सचेंज के प्लेटफॉर्म पर हो सकता है। ईटीएफ या इंडेक्स फंड मेंं निवेश की लागत सक्रियता से प्रबंधित एमएफ योजनाओं के मुकाबले कम होता है। इसके अलावा ऐक्टिव योजनाओं के कमजोर प्रदर्शन ने भारत में ईटीएफ की लोकप्रियता में इजाफा किया है।
सेबी ने अब परिचालन के स्तर पर बदलाव किया है कि ईटीएफ का गठन कैसे होगा और एमएफ हाउस इसका प्रबंधन कितने लचीलेपन के साथ करेंगे। उदाहरण के लिए नियामक ने मार्केट मेकर्स के लिए शुद्ध निपटान की इजाजत दी है। इसके अलावा सेबी ने डेट ईटीएफ के लिए न्यूनतम सबस्क्रिप्शन रकम महज 10 करोड़ रुपये और अन्य ईटीएफ के लिए 5 करोड़ रुपये कर दिया है। महत्वपूर्ण यह है कि नियामकों ने ईटीएफ एनएफओ के लिए एक विकल्प शुरू किया है, जहां परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियां यूनिट के सृजन के लिए शुरुआती फंडों का योगदान कर सकती हैं। इसके बाद एएमसी इस यूनिट का हस्तांतरण मार्केट मेकर्स या निवेशकों को कर सकती हैं।
एनएसई इंडाइसेज के सीईओ मुकेश अग्रवाल ने कहा, सेबी ने पैसिव फंड उद्योग के लिए सही राह तैयार कर दी है ताकि वह आगामी वर्षों में तेजी से आगे बढ़े। ईटीएफ की तरलता में इजाफे के लिए सेबी ने मार्केट मेकिंग के नियमों को आसान बना दिया और इसके तहत उन्हें शुद्ध निपटान की इजाजत दी है, जो प्रक्रिया को पूंजी के लिहाज से कम गहन बना देगा और और कंपनियों को मार्केट मेकर्स के तौर पर काम करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसके अलावा सेबी ने एक बदलाव किया है जो और एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर और ट्रेड को प्रोत्साहित करेगा और कुल मिलाकर तरलता में इजाफा होगा। साथ ही एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर इंट्रा डे एनएवी का लाइव डिस्प्ले, एनएफओ के लिए न्यूनतम सबस्क्रिप्शन में कमी और निवेशक शिक्षा शुल्क घटाने वाला कदम स्वागतयोग्य है।
सेबी ने कहा है कि 25 करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश निकासी या सबस्क्रिप्शन सीधे एएमसी के साथ होगा, वहीं छोटे ऑर्डर एक्सचेंज प्लेटफॉर्म पर दिए जाएंगे। नियामक ने निवेशक शिक्षा व जागरूकता शुल्क ईटीएफ व इंडेक्स फंडों से जुड़ी योजनाओं के लिए शुद्ध ऐसेट वैल्यू का महज एक फीसदी कर दिया है। फंड ऑफ फंड्स के लिए यह शुल्क पूरी तरह हटा दिया गया है।

First Published : May 25, 2022 | 12:41 AM IST