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HDFC Bank की री-रेटिंग में हो सकती है देरी

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 1:38 PM IST

विश्लेषकों (Analysts) ने सोमवार को कहा कि HDFC Bank के HDFC के साथ विलय को लेकर रेगुलेटरी मंजूरी पर जारी अनिश्चितता की वजह से कंपनी की री-रेटिंग (फिर से रेटिंग) में देरी हो सकती है।
विश्लेषकों के मुताबिक, प्रबंधन को उम्मीद है कि विलय वित्त वर्ष 2023-24 के पहली या दूसरी तिमाही (Q1 या Q2) से पहले पूरा हो जाएगा, लेकिन स्टॉक में तेजी धीरे-धीरे ही सही बनी रह सकती है ।

Emkay Global के आनंद दामा ने हीत खिमावत और दीक्षित सांखरवा के साथ एक साझा नोट में कहा है, “शेयरधारकों की बैठक 25 नवंबर, 2022, को होने वाली है, जिसके बाद विलय की प्रक्रिया को पूरा करने में 7-8 महीने तक का समय लग सकता है। HDFC Life की हिस्सेदारी और इस विलय की रूपरेखा को लेकर RBI के दिशा निर्देश को लेकर तस्वीर अभी भी स्पष्ट नहीं हुई है।"
 
ब्रोकरेज हाउस ने सितंबर तिमाही (Q2FY23) के परिणाम के बाद बैंक के स्टॉक पर अपनी दीर्घकालिक ‘खरीद’ (Buy) रेटिंग और 1,800 रुपये का लक्ष्य मूल्य (target price) बनाए रखा है। ब्रोकरेज का मानना है कि प्रतिकूल मर्जर स्ट्रक्चर और अर्थव्यवस्था को लेकर जारी अनिश्चितता की वजह से लोन वृद्धि, विशेष रूप से खुदरा लोन वृद्धि में धीमापन प्रमुख जोखिम के तौर पर बने हुए हैं।
 
Kotak Institutional Equities (KIE) के विश्लेषकों ने भी अपनी ‘खरीद’ रेटिंग और लक्ष्य मूल्य target price (1,750 रुपये) अपरिवर्तित (unchanged) रखा है, क्योंकि उनका मानना है कि बाजार की निकट अवधि की चिंताओं का समाधान नहीं हुआ है।

 
Kotak Institutional Equities के मुताबिक, “fair value पर बैंक की दीर्घकालिक निवेश थीसिस काफी ठोस दिखती है। हालांकि, निकट अवधि में मर्जर से संबं​​धित चुनौतियां मायने रखेगी क्योंकि सुचारु बदलाव को लेकर विभिन्न नियामकीय संस्थाओं की तरफ से ​स्थिति को स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता है। इसलिए, हम मानते हैं कि री-रेटिंग के लिए एक लंबी समय-सीमा की दरकार है।”
 
Motilal Oswal Financial Services ने भी इस बात पर सहमति जताई है कि स्टॉक bourses पर धीरे-धीरे प्रदर्शन कर सकता है अगर रेवेन्यू और मार्जिन में आगे सुधार होता है, जबकि विलय की प्रक्रिया पूरी होने तक इससे संबंधित चिंताएं बाजार में हावी रहेगी।
 
दीर्घकालिक दृष्टिकोण ( long-term outlook) बरकरार

हाल ही में समाप्त तिमाही (Q2FY23) के दौरान, HDFC Bank ने शुद्ध लाभ में 10,605.8 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की। जो सालाना आधार पर 20.1 प्रतिशत (YoY) और तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) 15.3 प्रतिशत ज्यादा है।
 
बैंक की net interest income (NII)/शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) सालाना आधार पर 19 प्रतिशत बढ़कर 21,021.2 करोड़ रुपये हो गई, जिसमें कुल शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम/net interest margin) कुल संपत्ति पर लगभग 10 आधार अंक बढ़कर 4.1 प्रतिशत और ब्याज अर्जित करने वाली संपत्ति के आधार पर 4.3 प्रतिशत हो गया।

 
यह दो तिमाहियों में HDFC Bank का पहला मार्जिन विस्तार था, और Q2FY19 के बाद से NII में उच्चतम sequential वृद्धि थी।

ICICI Securities के कुणाल शाह ने कहा, “हम वित्त वर्ष 23 और वित्त वर्ष 24 के लिए क्रमशः 3.9 प्रतिशत और 4 प्रतिशत पर मार्जिन (गणना) अनुमान लगा रहे हैं ।”

 
इसके अलावा, मुंबई-स्थित ऋणदाता की सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) अनुपात, और शुद्ध NPA अनुपात  तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) 5 आधार अंक, और 2 आधार अंक घटकर 1.23 प्रतिशत और 0.33 प्रतिशत रही । Provision coverage ratio (PCR) 73 प्रतिशत पर स्थिर था, और restructured book 7,850 करोड़ रुपये तक गिर गई।

इसे देखते हुए, सीएलएसए (CLSA) का अनुमान है कि HDFC Bank का स्टॉक अंडरपरफॉर्मेंस  (underperformance) के अंतिम दौर में है।

 
शेयर बाजारों में, HDFC Bank के शेयर इंट्रा-डे 1 फीसदी से अधिक चढ़कर 1,458 रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गए। इसकी तुलना में बेंचमार्क S&P BSE Sensex सुबह 10:45 बजे 0.5 फीसदी ऊपर था।

First Published : October 17, 2022 | 3:15 PM IST