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मध्यावधि में रिस्क-रिवार्ड नहीं अनुकूल

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 1:40 PM IST

बढ़ती मुद्रास्फीति और केंद्रीय बैंक की सख्त नीतियों के बीच इक्विटी बाजारों ने वित्त वर्ष 2022-23 की दूसरी छमाही  की शुरुआत सतर्कता के साथ की है। नोमुरा के भारत में प्रबंध निदेशक एवं इक्विटी शोध प्रमुख सायन मुखर्जी ने पुनीत वाधवा के साथ एक साक्षात्कार में बताया कि मौजूदा धारणा को देखते हुए, अब तेजी के कारकों के मुकाबले गिरावट के ज्यादा जोखिम हैं। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

क्या बाजार चिंताओं से पूरी तरह उबर चुके हैं, या आप वैश्विक केंद्रीय बैंकों, खासकर अमेरिकी फेड द्वारा मौद्रिक नीति समीक्षा के समय हर बार बड़ी बिकवाली की आशंका जता रहे हैं?
अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। मुद्रास्फीति और दर से जुड़ी चिंताओं को बाजार भांप चुका है। हालांकि मध्यावधि में वृद्धि और मुद्रास्फीति की स्थिरता को लेकर अनिश्चितताएं हैं। इसलिए हमें बाजारों द्वारा इन मानकों पर ज्यादा प्रतिक्रिया दिखाए जाने का अनुमान है। अमेरिकी फेड और केंद्रीय बैंकों ने मुद्रास्फीति को अपनी मुख्य चिंता के तौर पर देखा है। बाजार मुद्रास्फीति आंकड़े पर भी प्रतिक्रिया करेंगे, क्योंकि इससे केंद्रीय बैंक के कदमों में बदलाव आएगा। बदलते समय के साथ, वृद्धि मुख्य चिंता के तौर पर उभरेगी, जो खासकर मुद्रास्फीति/दरों के मुकाबले भारत के लिए ज्यादा बड़ी समस्या होगी।

क्या आप भारतीय बाजार में ‘तेजी में बेचें’ या ‘गिरावट पर खरीदें’ की रणनीति को पसंद कर रहे हैं?
हम सतर्क हैं, क्योंकि वृहद स्तर पर समस्याएं कम नहीं हो रही हैं और इक्विटी मूल्यांकन ऊंचा है। भारतीय बाजारों ने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है, क्योंकि मुद्रास्फीति/दरें वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं और बाजारों के लिए भारत की तुलना में ज्यादा बड़ी चिंताएं हैं। इस संदर्भ में, भारत इन समस्याओं से निकलता दिख रहा है। हालांकि हम वैश्विक और भारत की वृद्धि को लेकर चिंतित बने हुए हैं। भारतीय बाजार मुद्रास्फीति/दर परिदृश्य के मुकाबले वृद्धि परिदृश्य को लेकर ज्यादा सतर्क बना रहेगा। 

 
आप भारतीय इक्विटी बाजारों के लिए अगले वर्ष/संवत को किस नजरिये से देख रहे हैं? क्या तेजी के लिए कारकों के बजाय ज्यादा समस्याएं नजर आ रही हैं?

भारतीय बाजारों ने अब तक अच्छा प्रदर्शन किया है। भारत के लिए वृहद स्तर पर समस्याएं अन्य अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले कम हैं। कॉरपोरेट आय भी जिम्मेदार है। बैंक, कॉरपोरेट और घरेलू बैलेंस शीट अच्छी स्थिति में हैं। बाजार को घरेलू प्रवाह से मदद मिली है और अब विदेशी प्रवाह भी सुधरा है। मौजूदा धारणा को देखते हुए अब तेजी के लिए कारकों के मुकाबले गिरावट के जोखिम ज्यादा नजर आ रहे हैं। ब्याज दरों में वृद्धि और कमजोर बाजार प्रदर्शन से इक्विटी बाजारों में कम पूंजी प्रवाह आकर्षित होगा। इसके अलावा, वृद्धि में नरमी से बड़ी निराशा मिल सकती है और इससे कॉरपोरेट आय तथा वृद्धि के अनुमानों में कटौती को बढ़ावा मिल सकता है। 

आप 12 महीने के नजरिये से लार्जकैप, मिडकैप या फिर स्मॉलकैप शेयरों को पसंद करेंगे?

रिस्क-रिवार्ड अल्पावधि से मध्यावधि में इक्विटी के लिए ज्यादा अनुकूल नहीं है। सभी बाजार पूंजीकरण में, हम ऐसे शेयर पसंद कर रहे हें जिनमें वृद्धि की संभावनाएं बहुत ज्यादा नहीं हैं, जैसा कि ऊंचे मूल्यांकन मल्टीपल में दिखा है।
 

मौजूदा हालात में आप बाजार मूल्यांकन को लेकर कितने सहज महसूस कर रहे हैं? क्या विदेशी निवेशक प्रवाह हाल के महीनों के दौरान बढ़ा है, या आर्थिक संकेतकों फिर से बिकवाली बढ़ने का अनुमान है?
भारतीय इक्विटी बाजारों ने वैश्विक बाजारों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। उभरते बजार (ईएम) प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बाजार मूल्यांकन में तेजी करीब 40 प्रतिशत के दीर्घावधि औसत की तुलना में 70 प्रतिशत है। भारतीय इक्विटी का मूल्यांकन प्रीमियम काफी हद तक भारत की मजबूत स्थिति के तौर पर दिखा है। बढ़ती दरों और मंदी की आशंका के बीच बिकवाली का जोखिम बना हुआ है।

बढ़ती ब्याज दर और मुद्रास्फीति के परिवेश में आपकी निवेश रणनीति क्या है? मार्च 2030 तक सेंसेक्स/निफ्टी50 कहां तक पहुंच सकता है?
निफ्टी के लिए हमारा दिसंबर 2022 का लक्ष्य 16,900 है। हमने बॉटम-अप दृष्टिकोण अपनाया है और उपयुक्त मूल्यांकन वाली और वृद्धि की बहुत ज्यादा संभावना से दूर रहने वाली कंपनियों को पसंद किया है। हम बैंकों, फार्मा और इंडस्ट्रियल/निर्माण पर ओवरवेट हैं और उपभोक्ता व्यवसायों पर सतर्क बने हुए हैं।

सितंबर तिमाही के आय परिणाम से आपको क्या उम्मीदें हैं? क्या मुद्रास्फीति और उत्पादन लागत वृद्धि के प्रभाव का आंकड़ों पर पूरी तरह से असर दिखेगा?
आय सीजन काफी हद तक उम्मीद के अनुरूप रहेगा। हमारे हिसाब से, ऊंची जिंस कीमतों का प्रभाव दलाल पथ पर दिख चुका है। हम बाद की तिमाहियों में कम लागत का सकारात्मक असर देख सकते हैं।

 

First Published : October 16, 2022 | 11:00 PM IST