सोमवार यानी 26 सितंबर 2022 को रुपया रिकॉर्ड नए निचले स्तर पर लुढ़क गया। डॉलर के मुकाबले रुपया 56 पैसे की कमजोरी के साथ खुला। रुपया 81.55 प्रति डॉलर के निचला स्तर पर पहुंचा है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के गिरने से कच्चे तेल और अन्य सामानों का आयात महंगा हो जाएगा जिससे महंगाई और बढ़ जाएगी।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) इस सप्ताह के अंत में द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करने वाली है। इससे पहले SBI की एक रिपोर्ट में कहा गया, ‘कोई भी केंद्रीय बैंक अपनी मुद्रा के अवमूल्यन को फिलहाल रोक नहीं सकता है और आरबीआई भी सीमित अवधि के लिए रूपये में गिरावट होने देगा।’
साथ ही इसमें यह भी आश्वासन दिया गया है कि मुद्रा जब एक निचले स्तर पर स्थिर हो जाती है तो फिर वो नाटकीय ढंग से तेजी पर भी आती है और भारत के संदर्भ में इस बात की संभावना बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपये की कीमत में यह गिरावट डॉलर की मजबूती की वजह से आई है, घरेलू आर्थिक मूलभूत कारणों से नहीं.
क्रूड आयात निर्यात बढ़ने से दोगुना हुआ घाटा
भारत में अगस्त महीने में क्रूड ऑयल का आयात बढ़ने से व्यापार घाटा दोगुना से अधिक होकर 27.98 अरब डॉलर पहुंच गया। इस वर्ष अगस्त में पेट्रोलियम, कच्चे तेल एवं उत्पादों का आयात सालाना आधार पर 87.44 फीसदी बढ़कर 17.7 अरब डॉलर हो गया।