डॉलर के मुकाबले रुपया सोमवार को नए निचले स्तर पर बंद हुआ क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं, जिसने भारत के चालू खाते के घाटे के परिदृश्य को खराब कर दिया। डीलरों ने यह जानकारी दी।
भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 79.98 पर बंद हुई जबकि शुक्रवार को यह 79.88 प्रति डॉलर पर रही थी। पिछले छह कारोबारी सत्र में से पांच सत्रों में रुपये नए निचले स्तर पर बंद हुआ है और साल 2022 में अब तक डॉलर के मुकाबले 7.1 फीसदी कमजोर हुआ है।
सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें उछल गईं क्योंकि उत्पादन बढ़ाने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की पश्चिम एशियाई देशों से बातचीत नाकाम रही।
ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2 फीसदी से ज्यादा बढ़ाऔर 104 डॉलर प्रति बैरल की ओर चला गया। चूंकि भारत अपनी ईंधन जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें देश का चालू खाते के घाटे पर खासा दबाव बढ़ाती है।
बताया जाता है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने 79.91-79.92 के आशपास डॉलर बिक्री के जरिए हस्तक्षेप किया और रुपये की गिरावट थामने में मदद की।
मौजूदा ट्रेडर हालांकि रुपये को आगामी दिनों में 80 के पार जाता देख रहे हैं क्योंकि आरबीआई ऐसे समय में अपना विदेशी मुद्रा भंडार ज्यादा खाली नहीं करना चाहेगा जब बाजार के फंडामेंटल रुपये में गिरावट का रुख बताते हैं।
ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई 7 फीसदी है, जो आरबीआई के 2-6 फीसदी के अनुमान से ऊपर है। इस बीच देश का व्यापार घाटा 26.18 अरब डॉलर के रिकॉर्ड मासिक उच्चस्तर पर है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने एक नोट में कहा, कमजोर आर्थिक आंकड़े और विदेशी फंडों की निकासी रुपये पर असर डाल रही है। हालांकि केंद्रीय बैंक की कोशिश से रुपये को सहारा मिला है। अगर हम हालिया विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े देखें तो यह 8 अरब डॉलर घटकर 580.06 अरब डॉलर रह गया है। फर्म ने कहा, डॉलर-रुपया के प्रतिरोध का स्तर 80 पर है, उसके बाद 80.90 पर, वहीं डॉलर को 78.80 से 78.50 पर सहारा मिल सकता है।
बिजनेस स्टैंडर्ड की रायशुमारी में 10 विशेषज्ञों ने जुलाई के आखिर में डॉलर के मुकाबले रुपया 80.20 पर रहने का अनुमान जताया है और सितंबर के आखिर में 80.50 पर।