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SEBI का ऊंचे जोखिम वाले FPI से अतिरिक्त खुलासे का प्रस्ताव

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भाषा   
Last Updated- May 31, 2023 | 1:31 PM IST

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने ऊंचे जोखिम वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की ओर से अतिरिक्त खुलासे को अनिवार्य करने का प्रस्ताव किया है। इससे न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (MPS) की जरूरत को लेकर किसी तरह की कोताही से बचा जा सकेगा।

नियामक के संज्ञान में आया है कि कुछ FPI ने अपने इक्विटी पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा एक कंपनी में केंद्रित किया हुआ है। कुछ मामलों में तो यह हिस्सेदारी लंबे समय से कायम और स्थिर है। SEBI ने कहा, ‘इस तरह के केंद्रित निवेश से यह चिंता और संभावना बढ़ती है कि ऐसे कॉरपोरेट समूहों के प्रवर्तक या अन्य निवेशक न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता जैसी नियामकीय आवश्यकताओं को दरकिनार करने के लिए FPI मार्ग का उपयोग कर रहे हैं।’

अपने परामर्श पत्र में नियामक ने उच्च जोखिम वाले ऐसे FPI से बारीकी से जानकारी प्राप्त करने का प्रस्ताव किया है जिनका निवेश एकल कंपनियों या कारोबारी समूहों में केंद्रित हैं। प्रस्ताव के तहत ऐसे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को स्वामित्व, आर्थिक हित और ऐसे कोषों के नियंत्रण के बारे में अतिरिक्त खुलासा करने की जरूरत होगी।

इसके साथ ही नियामक ने जोखिम के आधार पर FPI का वर्गीकरण करने का सुझाव दिया है। इसके तहत सरकार और संबंधित इकाइयों मसलन केंद्रीय बैंक और सॉवरेन संपदा कोष को कम जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है, वहीं पेंशन कोष और सार्वजनिक खुदरा कोष को मध्यम जोखिम के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इनके अलावा अन्य सभी FPI को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है।

First Published : May 31, 2023 | 1:31 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)