सुजलॉन एनर्जी के मुख्य वित्त अधिकारी हिमांशु मोदी ने मंगलवार को कहा कि कंपनी अगर 1,200 करोड़ रुपये का राइट्स इश्यू पूरी तरह से बिक जाता है तो कंपनी 583.5 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाने में सक्षम होगी।
मोदी ने यह भी कहा कि कंपनी बचे हुए कर्ज को भी अगले आठ साल में चुकाने का प्रयास कर रही है।
एक ऑनलाइन बैठक के दौरान मोदी ने कहा कि 30 जून, 2022 तक कंपनी पर कुल 3,200 करोड़ रुपये का कर्ज था। राइट्स इश्यू के पूरी तरह से बिकने के बाद कंपनी पहले चरण में 583.5 करोड़ रुपये का भुगतान करेगी। यह भुगतान लेनदारों को किया जाएगा। कंपनी बचे हुए कर्ज को भी आठ साल में चुकाने में सक्षम हो जाएगी।
कंपनी 240 करोड़ आंशिक चुकता शेयर 5 रुपये प्रति शेयर के भाव पर जारी करेगी, जो कुल 1,200 करोड़ रुपये का होगा। मोदी ने कहा कि सुजलॉन के प्रवर्तकों और प्रवर्तक समूह ने अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है। पिछले हफ्ते, सन फार्मास्युटिकल्स के संस्थापक दिलीप सांघवी ने कंपनी के प्रवर्तकों को कंपनी के राइट्स इश्यू में पूरी तरह से भाग लेने के अपने विचार से अवगत कराया था।
2015 में सांघवी ने 1,800 करोड़ रुपये का निवेश कर सुजलॉन में 23 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदी थी, जिससे कंपनी मुनाफे में फिर से लौट सके। यह कंपनी 2012 में भारत की सबसे बड़ी परिवर्तनीय बॉन्ड डिफाल्टर साबित हुई थी।
ऋण पुनर्गठन योजना के रूप में ऋणदाताओं द्वारा कुछ ऋण को इक्विटी होल्डिंग में परिवर्तित करने के बाद, तांती के नेतृत्व वाले प्रवर्तक समूह ने कंपनी में संयुक्त रूप से 14.5 फीसदी की हिस्सेदारी रखी है। इस प्रवर्तक समूह में तांती के परिवार व उनके भाई शामिल है।