सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाए जाने के बाद से वैश्विक इक्विटी बाजारों के लिए उतार-चढ़ाव का दौर बना हुआ है। जूलियस बेयर इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं वरिष्ठ सलाहकार उमेश कुलकर्णी ने पुनीत वाधवा को दिए साक्षात्कार में कहा कि भारतीय बाजारों में गिरावट मजबूत आर्थिक और आय वृद्धि की रफ्तार की वजह से सीमित हो सकती है। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:
क्या वैश्विक बाजार अपने जून 2022 के निचले स्तर फिर से छू सकते हैं, या इनमें और ज्यादा गिरावट आ सकती है?
अमेरिकी बाजार (एसऐंडपी 500, नैस्डैक 100) पहले ही जून के निचले स्तरों पर पहुंच चुके हैं। जून के मध्य से आई तेजी को तेल/जिंस कीमतों में गिरावट से सुधरी धारणा के साथ साथ इन उम्मीदों से भी मदद मिली कि अमेरिकी फेड मंदी को लेकर पैदा हुईं चिंताओं की वजह से कम सख्ती बरतेगा।हालांकि वैश्विक इक्विटी में ताजा तेजी संक्षिप्त थी और यह फेड द्वारा अपने आक्रामक रुख को अपनाए जाने के साथ मंदी के बाजार की तेजी जैसी अधिक थी। भारतीय इक्विटी बाजारों ने अब तक वैश्विक बाजार में गिरावट से अलग बने रहने की कोशिश की है और उन्हें मुख्य तौर पर घरेलू आर्थिक गतिविधि में तेज सुधार और आय की रफ्तार के साथ साथ वर्ष के दौरान मजबूत घरेलू प्रवाह से मदद मिली।
क्या भारतीय बाजार अगले कुछ महीनों के दौरान अपनी चाल बदलेंगे?
भविष्य में, तीन प्रमुख चुनौतियां आएंगी। घरेलू प्रवाह में कमजोरी के संकेत दिख रहे हैं और इसकी रफ्तार आगे बरकरार नहीं रह सकती है, खासकर बढ़ती
वैश्विक अनिश्चितताओं की वजह से। दूसरा, अमेरिकी डॉलर की मौजूदा मजबूती से एफआईआई प्रवाह पर विराम लग सकता है। तीसरा, घरेलू ब्याज दरें आरबीआई की सख्ती के बीच बढ़ी हैं, और इक्विटी निवेशकों के लिए लागत बढ़ी है। हालांकि भारत अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले बेहतर स्थिति में दिख रहा है।
मुद्रास्फीति के बाद, क्या तरलता दबाव से बाजार प्रभावित होंगे, खासकर तब जब अमेरिकी फेड रिजर्व ने अपनी बैलेंस शीट को लेकर सख्त रुख अपनाया है?
फेड मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए तत्परता दिखा रहा है और बढ़ती ब्याज दरों की मौजूदा अवधि इक्विटी बाजारों के लिए निश्चित तौर पर एक परीक्षण की अवधि है, क्योंकि दुनिया मंदी के मुआयने पर खड़ी नजर आ रही है। बदलते भूराजनीतिक परिदृश्य , और उसके परिणामस्वरूप आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान और ऊर्जा किल्लत से भी चिंताएं बढ़ रही हैं। इन वजहों से, वैश्विक बाजार पहले ही बड़ी गिरावट (एसऐंडपी 500 और नैस्डैक 100 में कैलेंडर वर्ष 2022 में अब तक 20 और 30 प्रतिशत की कमजोरी आई है) के शिकार हुए हैं।
जून के अंत से आपकी रणनीति कैसी रही है?
हमने घरेलू चक्रीयता, मुख्य तौर पर वित्त, उद्योग, सीमेंट, रियल एस्टेट एवं एंसिलियरी, वाहन और कुछ खास घरेलू खपत आधारित क्षेत्रों में निवेश पर जोर दिया है। दूसरी तरफ, हम आईटी और कंज्यूमर स्टैपल्स पर सतर्क बने रहे। मौजूदा समय में, हम अल्पावधि के लिए रक्षात्मक नजरिया अपनाने और आईटी, हेल्थकेयर और खपत जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का सुझाव देंगे।
यदि बाजार में तेजी आती है तो कौन से क्षेत्र तेजी से चढ़ सकते हैं?
अगले कुछ वर्षों के दौरान वित्तीय क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा बना रह सकता है। ऋण वृद्धि में सुधार और कम ऋण लागत के समावेश से इस क्षेत्र को शानदार आय वृद्धि दर्ज करने में मदद मिल सकती है। वित्त के अलावा, हम उद्योग एवं इन्फ्रा, घर मरम्मत और खपत जैसे क्षेत्रों में भी सुधार आने की उम्मीद कर रहे हैं।
आपकी नजर में शानदार क्षेत्र कौन सा हो सकता है?
जो क्षेत्र मजबूती के साथ उबर सकता है, वह है हेल्थकेयर, जिसका प्रदर्शन पिछले कुछ वर्षों के दौरान कमजोर रहा। हमारा मानना है कि यह क्षेत्र अब नियामकीय चुनौतियों और जेनेरिक कीमतों में कमी समेत कई बाधाओं को पार कर रहा है।