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एसआईपी में सीधे निवेश की रफ्तार बढ़ी

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 3:00 PM IST

कुल एसआईपी में डायरेक्ट प्लान की हिस्सेदारी तीन साल में 31 फीसदी हो गई पर एसआईपी एयूएम में उसकी हिस्सेदारी इस अनुपात में नहीं बढ़ी 

म्युचुअल फंड योजनाओं में निवेश के लिए डायरेक्ट ऑप्शन रेग्युलर प्लान से पिछड़ा हुआ है जबकि डायरेक्ट ऑप्शन चुनने से लागत में बचत होती है। अब हालांकि यह तेजी से रफ्तार पकड़ने लगा है। उद्योग निकाय एम्फी के आंकड़ों से पता चलता है कि कुल सक्रिय एसआईपी में डायरेक्ट प्लान की हिस्सेदारी 3 साल में 20 फीसदी से बढ़कर 31 फीसदी हो गई।

म्युचुअल फंड की हर योजना में दो विकल्प होते हैं : रेग्युलर और डायरेक्ट। रेग्युलर प्लान की बिक्री वितरक करते हैं, जिन्हें इसके बदले कमीशन मिलता है। खुद से निवेश वाली योजनाओं में वितरक को कमीशन नहीं देना होता।
 

डायरेक्ट प्लान वाले खातों की संख्या हालांकि बढ़ी है लेकिन कुल एसआईपी एयूएम में इसकी हिस्सेदारी उस अनुपात में नहीं बढ़ी है। अगस्त 2020 में कुल एसआईपी एयूएम में डायरेक्ट प्लान की हिस्सेदारी 13 फीसदी थी और तब से यह बढ़कर 16 फीसदी ही हो पाया है। दो वजहों से ऐसा हुआ है। ज्यादातर डायरेक्ट एसआईपी खाते रेग्युलर प्लान एसआईपी के मुकाबले नए हैं। साथ ही इस चैनल के जरिए एसआईपी निवेश की औसत रकम कम है।
 

पांच साल से ज्यादा पुराने निवेशकों के 91 फीसदी खाते रेग्युलर प्लान के तहत हैं, जो बताता है कि डायरेक्ट एसआईपी अपेक्षाकृत नया घटनाक्रम है। डायरेक्ट प्लान की हिस्सेदारी सुधरती है अगर एसआईपी तीन साल से ज्यादा पुराने हों। अभी भी कुल खातों का सिर्फ एक तिहाई ही ऐसा है। डायरेक्ट प्लान की पेशकश वित्तीय तकनीकी कंपनियां  मसलन ग्रो, जीरोधा और पेटीएम मनी करती हैं, जो युवा निवेशकों के बीच लोकप्रिय हैं। साथ ही हम फंड हाउस के जरिये भी डायरेक्ट प्लान में निवेश कर सकते हैं – उसकी वेबसाइट या शाखा के जरिये।
 

अप्रैल के कैम्स एमएफडीएक्स के आंकड़ों  के मुताबिक, ऑनलाइन इ़न्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म पर एसआईपी निवेश का औसत आकार रेग्युलर प्लान के मुकाबले कम रहा। उदाहरण के लिए फोनपे के प्लेटफॉर्म पर हर महीने औसतन  816 रुपये निवेश किए जबकि ग्रो के प्लेटफॉर्म  पर एसआईपी का औसत आकार 1,559 रुपये था। इसकी तुलना में प्रीमियम रेग्युलर प्लान डिस्ट्रिब्यूटर मसलन एनजे इंडिया इन्वेस्ट व एसबीआई के पास औसत एसआईपी आकार क्रमश: 2,779 रुपये व 2,047 रुपये था। इसके परिणामस्वरूप डायरेक्ट एसआईपी खातों का औसत एयूएम डायरेक्ट प्लान के मुकाबले काफी कम रहा। 

क्या डायरेक्ट प्लेटफॉर्म की रफ्तार बनी रह सकती है?
डायरेक्ट प्लान के जरिये निवेश करने वालों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण कमीशन पर बचत है। हालांकि यह परिदृश्य बदल सकता है क्योंकि सेबी का प्रस्ताव फिनटेक कंपनियों को लेनदेन शुल्क वसूलने से संबंधित है, चाहे वह परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी से वसूले या फिर निवेशकों से। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो डायरेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म के ज​रिये निवेश पर बचत सिकुड़ सकता है। एक बार फिर रेग्युलर प्लान को प्राथमिकता दी जाने लगेगी।

First Published : September 25, 2022 | 10:49 PM IST